Bihar में 11 सैटेलाइट शहरों में जमीन की खरीद-बिक्री से हटेगी रोक, मास्टर प्लान के बाद शुरू होगी रजिस्ट्री

Bihar: बिहार सरकार ने राज्य में आधुनिक शहरीकरण को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने 11 ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री और ट्रांसफर पर लगी रोक को हटाने का निर्णय लिया है। यह

Bihar: बिहार सरकार ने राज्य में आधुनिक शहरीकरण को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने 11 ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री और ट्रांसफर पर लगी रोक को हटाने का निर्णय लिया है। यह रोक विकास योजना यानी मास्टर प्लान के अंतिम प्रकाशन के बाद हटाई जाएगी, जिससे इन इलाकों में जमीन का लेन-देन फिर से शुरू हो सकेगा।

नगर विकास एवं आवास विभाग ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है। सरकार का मानना है कि इस कदम से सुनियोजित शहरी विकास को गति मिलेगी। डेवलपमेंट प्लान लागू होने के बाद जमीन का इस्तेमाल, बुनियादी ढांचे का निर्माण और मकान बनाने से जुड़ी सभी गतिविधियां तय नियमों के हिसाब से होंगी। प्रस्तावित बिहार नगर विकास प्राधिकरण इन सभी गतिविधियों का नियमन करेगा।

विकास योजना के लागू होने के बाद सरकार लैंड पुलिंग और भू-अर्जन जैसी प्रक्रियाएं भी शुरू करेगी। खास बात यह है कि अगर प्रारूप विकास योजना के प्रकाशन के बाद यह लगता है कि रोक हटाने से विकास कार्यों में कोई बाधा नहीं आएगी, तो बिहार नगर विकास प्राधिकरण अंतिम प्रकाशन से पहले भी फैसला ले सकता है।

इन सैटेलाइट शहरों के विकास के लिए HUDCO के साथ 1 लाख करोड़ रुपये का समझौता किया गया है। यह योजना बिहार टाउन प्लानिंग स्कीम नियमावली, 2025 के तहत लागू होगी। बिहार राज्य आवास बोर्ड को जमीन खरीदने के लिए नोडल एजेंसी बनाया गया है।

विवरण जानकारी
कुल टाउनशिप 11 (कुछ स्रोतों में 12)
प्रमुख शहर पटना, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, छपरा, गया, सीतामढ़ी, सहरसा, पूर्णिया, मुंगेर, भागलपुर और सोनपुर
पहले चरण के शहर पटना, सोनपुर, गया, दरभंगा, पूर्णिया, सहरसा और मुंगेर
कुल भौगोलिक क्षेत्र 3 लाख एकड़ से अधिक
जमीन वापसी भू-स्वामियों को विकसित भूमि का 55% हिस्सा मिलेगा
बुनियादी ढांचा 22% सड़क, 5% पार्क और 3% EWS आवास के लिए

हालिया अपडेट के अनुसार, 28 जुलाई 2026 को पाटलिपुत्र, हरिहरनाथपुर, मगध और तिरहुत टाउनशिप के लिए सामाजिक प्रभाव आकलन (SIA) का काम शुरू हुआ है। इसमें पाटलिपुत्र में लगभग 3,008 एकड़ और हरिहरनाथपुर में 2,000 एकड़ में कोर एरिया विकसित किया जाएगा। उम्मीद है कि इस विकास के बाद जमीन की कीमतों में काफी बढ़ोतरी होगी।