Bihar में अब ग्राम पंचायतों को मिला होल्डिंग टैक्स वसूलने का अधिकार, पक्के मकानों पर देना होगा 100 रुपये
Bihar: बिहार सरकार ने ग्रामीण इलाकों के विकास के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। अब राज्य की ग्राम पंचायतों को अपने क्षेत्र में होल्डिंग टैक्स और अन्य शुल्क लगाने और उन्हें वसूलने का अधिकार मिल गया है। इस कदम का मकसद पंचायतों
Bihar: बिहार सरकार ने ग्रामीण इलाकों के विकास के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। अब राज्य की ग्राम पंचायतों को अपने क्षेत्र में होल्डिंग टैक्स और अन्य शुल्क लगाने और उन्हें वसूलने का अधिकार मिल गया है। इस कदम का मकसद पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है ताकि उन्हें छोटे-मोटे कामों के लिए पूरी तरह राज्य सरकार के फंड पर निर्भर न रहना पड़े।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने 15 जुलाई, 2026 को ‘ग्राम पंचायत टैक्स, रेट्स और फीस रूल्स, 2026’ के मसौदे को मंजूरी दी। इस नए नियम के तहत अब गांव के लोग अपने मकान और व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर टैक्स देंगे। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से राज्य के 45,000 से ज्यादा राजस्व गांवों से करीब 1,300 करोड़ रुपये का अतिरिक्त फंड इकट्ठा होगा।
टैक्स की दरों को इस तरह तय किया गया है कि गरीब लोगों पर बोझ न पड़े। कच्चे मकानों को इस टैक्स से पूरी तरह बाहर रखा गया है, जबकि पीएम आवास योजना के तहत बने घरों के लिए बहुत कम दर रखी गई है। व्यावसायिक संस्थानों जैसे पेट्रोल पंप और सिनेमा हॉल पर ज्यादा टैक्स लगाया गया है।
| विवरण | सालाना टैक्स/शुल्क |
|---|---|
| पक्के मकान | ₹100 |
| अर्ध-पक्के मकान | ₹50 |
| पीएम आवास योजना (PMAY) मकान | ₹25 |
| पेट्रोल पंप, एलपीजी एजेंसी, सिनेमा हॉल | ₹5,000 |
| सफाई शुल्क | ₹25 |
| जलापूर्ति शुल्क | ₹25 |
अतिरिक्त मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने बताया कि इस पैसे का इस्तेमाल सीधे गांव के विकास में होगा। इससे ग्रामीण सड़कों का निर्माण, नालियों की सफाई, स्वच्छता और पीने के साफ पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाया जाएगा। पंचायतों को यह भी अधिकार होगा कि वे विज्ञापन, होर्डिंग और उद्योगों पर शुल्क लगा सकें। हालांकि, टैक्स की अधिकतम सीमा राज्य सरकार तय करेगी और पंचायतें उसी दायरे में रहकर वसूली करेंगी।