Bihar: दरभंगा राज की विरासत को लेकर बिहार सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने राज की संपत्तियों को अपने कब्जे में लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह कार्रवाई अंतिम महारानी कामसुंदरी दे
Bihar: दरभंगा राज की विरासत को लेकर बिहार सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने राज की संपत्तियों को अपने कब्जे में लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह कार्रवाई अंतिम महारानी कामसुंदरी देवी के निधन के बाद की जा रही है, क्योंकि उनके बाद संपत्ति का कोई कानूनी वारिस या वसीयत सामने नहीं आई है।
सरकार ने दखल की प्रक्रिया क्यों शुरू की?
दरभंगा राज की अंतिम महारानी कामसुंदरी देवी का निधन 12 जनवरी 2026 को हुआ। वह महाराज कामेश्वर सिंह की तीसरी पत्नी थीं और उनकी अपनी कोई संतान नहीं थी। सरकार का कहना है कि महारानी ने अपनी संपत्ति के लिए कोई वसीयत या वैध दस्तावेज नहीं छोड़ा है। ऐसे में कानूनी तौर पर राज्य सरकार को इन संपत्तियों का अधिग्रहण करने का अधिकार मिल जाता है।
दावे और आपत्तियों के लिए क्या है समय सीमा?
राजस्व विभाग ने इस मामले में पारदर्शिता रखने के लिए आम जनता से अपील की है। अगर किसी व्यक्ति या संस्था का इन संपत्तियों पर कोई दावा है, तो वे 10 मई 2026 तक अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। इस तारीख के बाद सरकार अधिग्रहण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी। इस पूरी कार्रवाई में निम्नलिखित पक्ष शामिल हैं:
- बिहार सरकार का राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग
- दरभंगा राज परिवार और उनके उत्तराधिकारी
- महाराजा कामेश्वर सिंह दरभंगा धार्मिक न्यास
- कुमार राजेश्वर सिंह और कुमार कपिलेश्वर सिंह
राज परिवार की आपत्ति और कानूनी विवाद क्या है?
राज परिवार ने सरकार के इस फैसले पर नाराजगी जताई है। परिवार का दावा है कि महाराज कामेश्वर सिंह ने एक वसीयत छोड़ी थी जिसे कलकत्ता हाई कोर्ट ने प्रमाणित किया था। साथ ही 1987 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार एक पारिवारिक समझौता भी हुआ था। परिवार का कहना है कि महारानी अपनी काफी संपत्ति पहले ही बेच चुकी थीं और बाकी हिस्सा हिंदू कानून के तहत उनके पति के करीबियों को मिलना चाहिए।
| विवरण |
जानकारी |
| अधिग्रहण का आधार |
वसीयत और वारिस का न होना |
| अंतिम तिथि (आपत्ति) |
10 मई 2026 |
| शामिल संपत्तियां |
जमीन, महल, भवन और बैंक खाते |
| मॉडल कानून |
बेतिया राज की तर्ज पर विशेष अधिनियम की तैयारी |