Siwan में नई चीनी मिल लगाने की तैयारी, बिहार सरकार देगी 70 करोड़ तक की सब्सिडी

Siwan: बिहार के सिवान जिले में नई चीनी मिल की स्थापना के लिए सरकार ने अपनी रफ़्तार बढ़ा दी है। जिला प्रशासन अब इस बात पर जोर दे रहा है कि इलाके में गन्ने की खेती का रकबा बढ़ाया जाए ताकि मिल के लिए पर्याप्त कच्चा माल मिल

Siwan: बिहार के सिवान जिले में नई चीनी मिल की स्थापना के लिए सरकार ने अपनी रफ़्तार बढ़ा दी है। जिला प्रशासन अब इस बात पर जोर दे रहा है कि इलाके में गन्ने की खेती का रकबा बढ़ाया जाए ताकि मिल के लिए पर्याप्त कच्चा माल मिल सके। गुरुवार को जिलाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय ने मैरवा में क्षेत्रीय विकास परिषद की बैठक कर इस पूरी योजना की समीक्षा की।

जिलाधिकारी ने साफ किया कि राज्य सरकार ने सिवान में चीनी मिल लगाने को अपनी प्राथमिकता वाली परियोजनाओं में रखा है और इसके लिए सही जमीन का चुनाव भी कर लिया गया है। उन्होंने जिला गन्ना पदाधिकारी और सहायक निदेशक को निर्देश दिए हैं कि गन्ने की खेती बढ़ाने के काम को सबसे ऊपर रखा जाए। साथ ही किसानों को फसल बीमा और किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) का लाभ समय पर दिलाने की बात कही गई है।

इस पूरी योजना को मजबूती देने के लिए बिहार सरकार ने ‘बिहार गन्ना उद्योग निवेश प्रोत्साहन नीति-2026’ भी लागू की है। गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार ने हाल ही में ‘शुगरकेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन पोर्टल (SIPP)’ की शुरुआत की है। इस पोर्टल के जरिए निवेशकों के लिए प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाया गया है।

नई चीनी मिल लगाने वाले निवेशकों को सरकार कई तरह की बड़ी छूट दे रही है, जो इस प्रकार हैं:

  • नई मिलों के लिए 70 करोड़ रुपये तक का आधार अनुदान मिलेगा, जबकि 5000 TCD क्षमता वाली मिलों के लिए यह राशि 100 करोड़ रुपये तक हो सकती है।
  • पांच साल तक 100% SGST की वापसी की जाएगी।
  • सरकारी जमीन 30 सालों के लिए मात्र 1 रुपये की टोकन राशि पर लीज पर दी जाएगी (अधिकतम 40 एकड़ तक)।
  • जमीन खरीदने पर लगने वाले निबंधन और स्टांप शुल्क की पूरी वापसी होगी।

मंत्री संजय कुमार के मुताबिक बिहार अब आधुनिक शुगर कॉम्प्लेक्स की ओर बढ़ रहा है, जहां चीनी मिल के साथ-साथ एथनॉल, बिजली उत्पादन और कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) इकाइयां भी लगाई जाएंगी। बता दें कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 16 जून 2026 को सिवान में चीनी फैक्ट्री की घोषणा की थी और जुलाई में पचरुखी और महाराजगंज इलाकों में जमीन की पहचान शुरू की गई थी।