Bihar: बिहार सरकार ने राज्य के उन मदरसों की बड़े पैमाने पर जांच कराने का फैसला किया है जिन्हें सरकार से अनुदान मिलता है। इस मुहिम का मकसद शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाना और सरकारी पैसों के गलत इस्तेमाल को रोकना है। श
Bihar: बिहार सरकार ने राज्य के उन मदरसों की बड़े पैमाने पर जांच कराने का फैसला किया है जिन्हें सरकार से अनुदान मिलता है। इस मुहिम का मकसद शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाना और सरकारी पैसों के गलत इस्तेमाल को रोकना है। शिक्षा विभाग ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि मदरसों का मौके पर जाकर निरीक्षण किया जाए और समय पर रिपोर्ट सौंपी जाए।
जांच की प्रक्रिया और नियम क्या हैं
शिक्षा विभाग के सचिव Vinod Singh Gunjiyal ने इस व्यापक जांच के आदेश जारी किए हैं। इसके लिए ब्लॉक स्तर पर तीन सदस्यों वाली कमेटियां बनाई गई हैं जो जमीनी स्तर पर जांच करेंगी। सभी District Education Officers (DEOs) को निर्देश दिया गया है कि वे अनुदान पाने वाले मदरसों का फिजिकल वेरिफिकेशन करें। जांच का मुख्य उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना और यह देखना है कि सरकारी मदद का सही उपयोग हो रहा है या नहीं।
e-Shiksha Kosh पोर्टल और मान्यता का मामला
पारदर्शिता के लिए अब सभी अनुदानित मदरसों और अल्पसंख्यक स्कूलों को छात्रों, शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की पूरी जानकारी e-Shiksha Kosh पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। पोर्टल पर हर कर्मचारी के लिए एक यूनिक आईडी बनाई जाएगी जिसकी जिला स्तर पर जांच होगी। इसके अलावा, जिन मदरसों या संस्कृत स्कूलों के पास वैध मान्यता नहीं होगी, जिला स्तर पर समीक्षा के बाद उन्हें बंद कर दिया जाएगा।
मंत्री और सरकार का क्या कहना है
मुख्यमंत्री Samrat Choudhary की सरकार ने निगरानी बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया है। शिक्षा मंत्री Mithilesh Tiwari ने साफ कहा है कि मदरसों और संस्कृत स्कूलों में किसी भी तरह का फर्जीवाड़ा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अवैध रूप से चल रहे संस्थानों पर सख्त कार्रवाई होगी ताकि सरकारी सहायता का लाभ सही जगह पहुंचे।
Frequently Asked Questions (FAQs)
बिहार में मदरसों की जांच क्यों की जा रही है
सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि सरकारी अनुदान का सही उपयोग हो और शिक्षा की गुणवत्ता बनी रहे। साथ ही, फर्जीवाड़े और बिना मान्यता के चल रहे संस्थानों को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है।
जांच के लिए क्या व्यवस्था की गई है
ब्लॉक स्तर पर तीन सदस्यों की कमेटियां बनाई गई हैं जो फिजिकल वेरिफिकेशन करेंगी। सभी डेटा को e-Shiksha Kosh पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा ताकि निगरानी आसान हो सके।