Bihar के सरकारी अस्पतालों में मशीन खराब होने पर भी नहीं रुकेगी जांच, स्वास्थ्य विभाग ने जारी किया नया निर्देश
Bihar: सरकारी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड और एक्सरे जैसी मशीनें खराब होने की वजह से मरीजों को होने वाली परेशानी अब कम होगी। स्वास्थ्य विभाग ने एक नया नियम बनाया है जिसके तहत अगर किसी अस्पताल में जांच मशीन काम नहीं कर रही
Bihar: सरकारी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड और एक्सरे जैसी मशीनें खराब होने की वजह से मरीजों को होने वाली परेशानी अब कम होगी। स्वास्थ्य विभाग ने एक नया नियम बनाया है जिसके तहत अगर किसी अस्पताल में जांच मशीन काम नहीं कर रही है, तो मरीज को वहां से वापस नहीं भेजा जाएगा। अब ऐसी स्थिति में मरीजों की जांच पास के किसी दूसरे सरकारी अस्पताल में कराई जाएगी ताकि उनके इलाज में देरी न हो।
स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा में यह बात सामने आई कि अस्पतालों में मशीनें अक्सर एक-दो दिन के लिए खराब हो जाती हैं। इस वजह से मरीजों को काफी दिक्कत होती थी और उन्हें अपनी जांच के लिए भटकना पड़ता था। इस समस्या को देखते हुए विभाग ने निर्देश दिया है कि किसी भी मरीज को मशीन खराब होने का बहाना बनाकर जांच से वंचित नहीं रखा जाएगा।
इस पूरे इंतजाम की जिम्मेदारी अब Civil Surgeons और अस्पताल प्रभारियों को सौंपी गई है। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि मरीजों की जांच के लिए दूसरे अस्पताल में जरूरी व्यवस्था हो और उन्हें बिना किसी परेशानी के जल्द से जल्द टेस्ट मिल सकें। साथ ही, सभी सदर अस्पतालों और अन्य सरकारी केंद्रों पर सूचना बोर्ड (Signage) लगाने का आदेश दिया गया है। इन बोर्ड्स पर उपलब्ध सुविधाओं, टेस्ट और इलाज की पूरी जानकारी लिखी होगी ताकि मरीज और उनके परिवार को आसानी से पता चल सके कि वहां क्या सुविधा है।
हाल ही में 16 जून 2026 को मुजफ्फरपुर के सदर अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन खराब होने पर मरीजों ने विरोध प्रदर्शन भी किया था। इसी तरह की समस्याओं को रोकने के लिए बिहार सरकार ने मई 2026 में मेडिकल उपकरणों के रखरखाव के लिए 13.20 करोड़ रुपये की पहली किस्त मंजूर की थी। हालांकि, राज्य के कई अस्पतालों में टेक्नीशियन और स्पेशलिस्ट की कमी के कारण महंगी मशीनें अब भी बेकार पड़ी हैं। फिलहाल, National Health Mission (NHM) के तहत PPP मोड और इन-हाउस व्यवस्था के जरिए एक्सरे और अल्ट्रासाउंड जैसी सेवाएं मुफ्त दी जा रही हैं।