Bihar में कोसी, गंडक और गंगा उफान पर, कई जिलों के निचले इलाकों में फैला पानी
Bihar: राज्य में मानसून की सक्रियता और नेपाल में हो रही भारी बारिश के कारण कोसी, गंडक और गंगा समेत कई नदियां उफान पर हैं। इससे सुपौल, सहरसा, मधेपुरा और चंपारण समेत कई जिलों के निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है।
Bihar: राज्य में मानसून की सक्रियता और नेपाल में हो रही भारी बारिश के कारण कोसी, गंडक और गंगा समेत कई नदियां उफान पर हैं। इससे सुपौल, सहरसा, मधेपुरा और चंपारण समेत कई जिलों के निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है। जल संसाधन विभाग और जिला प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
कोसी नदी के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। 14 जुलाई को बराहक्षेत्र में जलस्तर चेतावनी स्तर को पार कर गया था, जिसके बाद कोसी बराज के 20 फाटक खोले गए। नेपाल के तराई क्षेत्रों में बारिश की वजह से जलस्तर में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। वर्तमान में डिस्चार्ज लगभग 1.72 लाख क्यूसेक है। मुख्य अभियंता संजीव शैलेश और अधीक्षण अभियंता संजय कुमार कंट्रोल रूम से निगरानी कर रहे हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि तटबंध सुरक्षित हैं और लोग घबराएं नहीं।
गंडक नदी की स्थिति भी गंभीर है। नेपाल से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण वाल्मीकिनगर गंडक बराज के सभी 36 फाटकों को आंशिक रूप से खोल दिया गया है। डुमरिया घाट पर नदी का जलस्तर 62.34 मीटर तक पहुंच गया है, जो खतरे के निशान से 12 सेंटीमीटर ऊपर है। इससे वाल्मीकिनगर जंगल और आसपास के निचले इलाकों में पानी भर गया है। बाढ़ नियंत्रण विभाग के एसडीओ सुनील कुमार के अनुसार, जलप्रवाह 2 लाख क्यूसेक के आंकड़े को पार कर सकता है।
वहीं गंगा नदी में भी इलाहाबाद से फरक्का तक जलस्तर बढ़ा है। मुंगेर, भागलपुर और कहलगांव में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कटिहार के मनिहारी में अलर्ट जारी किया गया है और नाव घाटों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। एसडीएम त्रिलोकीनाथ सिंह और एसडीपीओ विनोद कुमार ने नाविकों को ओवरलोडिंग न करने और लाइफ जैकेट का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए हैं।
राज्य सरकार ने स्थिति से निपटने के लिए कमर कस ली है। चीफ सेक्रेटरी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए हैं। राहत सामग्री का भंडारण शुरू कर दिया गया है और जल संसाधन विभाग ने नदियों की जमीनी हकीकत जानने के लिए एक पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय कमेटी बनाई है, जो एक महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।