Bihar में बनेगा पहला न्यूक्लियर पावर प्लांट, बांका जिले में लग सकते हैं रिएक्टर, 6 महीने में तैयार होगी DPR
Bihar: बिहार को जल्द ही अपना पहला परमाणु ऊर्जा संयंत्र मिलने वाला है। केंद्र सरकार ने राज्य में छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) आधारित प्लांट लगाने की मंजूरी दे दी है। इस बड़े प्रोजेक्ट की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) अगले
Bihar: बिहार को जल्द ही अपना पहला परमाणु ऊर्जा संयंत्र मिलने वाला है। केंद्र सरकार ने राज्य में छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) आधारित प्लांट लगाने की मंजूरी दे दी है। इस बड़े प्रोजेक्ट की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) अगले छह महीनों में तैयार हो जाएगी, जिससे राज्य में बिजली उत्पादन के नए रास्ते खुलेंगे।
इस प्रोजेक्ट के लिए बांका जिले के शंभूगंज और भितरिया गांवों को सबसे सही जगह माना गया है। यहाँ 700-700 मेगावाट की दो इकाइयां लगाने का प्रस्ताव है, जिससे कुल 1400 मेगावाट बिजली पैदा होगी। कुछ रिपोर्ट्स में यहाँ 2.8 गीगावाट क्षमता के प्लांट की बात भी कही गई है। इससे पहले नवादा के रजौली में 2,000 मेगावाट के प्लांट की चर्चा थी, लेकिन अब बांका को प्राथमिकता दी जा रही है। सिवान जिले का भी सर्वे हुआ था, पर भूकंप के खतरे की वजह से वहां संशय बना हुआ है।
बिहार सरकार चाहती है कि 20 नवंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस प्रोजेक्ट का शिलान्यास करें। निर्माण का काम वित्तीय वर्ष 2027-28 तक शुरू होने की उम्मीद है। इस पूरे काम की जिम्मेदारी न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) और एनटीपीसी (NTPC) को सौंपी गई है।
हाल ही में 18 जून 2026 को बिहार के जल संसाधन विभाग ने बदुआ जलाशय से पानी की आपूर्ति के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी कर दिया है। इससे पानी की बड़ी समस्या हल हो गई है। विभाग ने शर्त रखी है कि प्लांट चलाने के दौरान हर साल 22 MCM रेडिएशन रहित पानी वापस जलाशय में डालना होगा।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| प्रस्तावित स्थान | बांका (शंभूगंज और भितरिया) |
| अनुमानित क्षमता | 1400 मेगावाट (दो इकाइयां) |
| DPR की समय-सीमा | अगले 6 महीने |
| शिलान्यास लक्ष्य | 20 नवंबर 2026 |
| मुख्य एजेंसियां | NPCIL और NTPC |
| पानी का स्रोत | बदुआ जलाशय |
केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने इस मंजूरी की घोषणा की है। बिहार के ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि कोयले से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए परमाणु ऊर्जा जरूरी है। यह प्रोजेक्ट भारत के उस मिशन का हिस्सा है जिसके तहत 2047 तक परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 GW तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।