Bihar में पूर्व सैनिकों ने मांगी सरकारी नौकरी और शिक्षा में 10% आरक्षण, राज्यपाल से मिले प्रतिनिधिमंडल
Bihar: पटना के लोक भवन में सोमवार, 15 जून 2026 को अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैय्यद अता हसनैन से मुलाकात की। इस बैठक के दौरान पूर्व सैनिकों ने अपनी और अप
Bihar: पटना के लोक भवन में सोमवार, 15 जून 2026 को अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैय्यद अता हसनैन से मुलाकात की। इस बैठक के दौरान पूर्व सैनिकों ने अपनी और अपने परिवार की भलाई के लिए कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं। राज्यपाल ने इन मांगों को ध्यान से सुना और भरोसा दिलाया कि इन पर उचित विचार किया जाएगा।
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य रूप से बिहार की सभी सरकारी नौकरियों और प्रोफेशनल कॉलेजों जैसे मेडिकल, इंजीनियरिंग, लॉ और मैनेजमेंट में पूर्व सैनिकों और उनके बच्चों के लिए 10% हॉरिजॉन्टल आरक्षण की मांग की है। इसके अलावा, अग्निवीरों के लिए भी आरक्षण के लाभ देने की बात कही गई। बैठक में राज्यपाल के अतिरिक्त मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह, ब्रिगेडियर अनिल बेदी और ब्रिगेडियर मृगेन्द्र कुमार समेत थल सेना, वायु सेना और नौसेना के प्रतिनिधि मौजूद थे।
पूर्व सैनिकों ने अपनी अन्य मांगों को एक सूची के जरिए सामने रखा है, जो इस प्रकार हैं:
| प्रमुख मांगें | विवरण |
|---|---|
| जिला निगरानी समितियां | जिन जिलों में समितियां नहीं बनी हैं, वहां जल्द गठन हो |
| रोजगार | BMP-16 में पूर्व सैनिकों की नियुक्ति की जाए |
| सैनिक हेल्प डेस्क | सभी जिलों में हेल्प डेस्क का संचालन सुचारू रूप से हो |
| रजिस्ट्री शुल्क | सैनिकों और पूर्व सैनिकों को रजिस्ट्री फीस में छूट मिले |
| हथियार लाइसेंस | लाइसेंस की प्रक्रिया सरल हो और पूर्व सैनिकों को प्राथमिकता मिले |
| तैनाती | Dial 112 और SAP में भर्ती जवानों को उनके गृह जिले में पोस्टिंग मिले |
| आवास | AWHO के जरिए किफायती घर मिलें, जैसा अन्य राज्यों में है |
| कोटा | गुजरात की तर्ज पर बिहार में भी लिवर कोटा लागू हो |
राज्यपाल सैय्यद अता हसनैन ने सुझाव दिया कि पूर्व सैनिकों को अपनी आवाज को और ज्यादा प्रभावशाली बनाने के लिए एक एकल और मजबूत संगठन बनाना चाहिए। इससे आपसी तालमेल बेहतर होगा और मांगों को मजबूती से रखा जा सकेगा। फिलहाल बिहार सरकार की ओर से इन मांगों पर कोई आधिकारिक फैसला नहीं आया है और सभी की नजरें अब सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।