Bihar: पटना के अरण्या भवन में रविवार, 24 मई 2026 को एक खास इन्वेस्टर्स मीट का आयोजन किया गया। इस बैठक का मकसद बिहार के प्राकृतिक स्थलों को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करना है। सरकार अब निजी कंपनियों के साथ मिलकर राज्
Bihar: पटना के अरण्या भवन में रविवार, 24 मई 2026 को एक खास इन्वेस्टर्स मीट का आयोजन किया गया। इस बैठक का मकसद बिहार के प्राकृतिक स्थलों को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करना है। सरकार अब निजी कंपनियों के साथ मिलकर राज्य के डैम और तालाबों के किनारे वर्ल्ड क्लास सुविधाएं विकसित करने की तैयारी में है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिले और पर्यटन बढ़े।
किन जगहों का होगा विकास और क्या है मॉडल
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग ने इस प्रोजेक्ट के लिए 27 डैम साइट्स और 247 तालाबों की पहचान की है। इन जगहों को विकसित करने के लिए Build, Operate and Transfer (BOT) और Public-Private Partnership (PPP) मॉडल का इस्तेमाल किया जाएगा। मुख्यमंत्री Samrat Choudhary ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जलाशयों के पास पर्यटन सुविधाओं को व्यवस्थित तरीके से बनाया जाए ताकि पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिले।
इन्वेस्टर्स मीट में क्या हुई चर्चा और आगे की योजना
अपर मुख्य सचिव Anand Kishor की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में करीब 25 निवेशकों ने हिस्सा लिया। बैठक में बताया गया कि भीमबंध इकोटूरिज्म प्रोजेक्ट के लिए Request for Proposal (RFP) पहले ही जारी किया जा चुका है। अब 9 जून को एक और बड़ी बैठक होगी, जिसमें CII और चैंबर ऑफ कॉमर्स जैसे बड़े व्यापारिक संगठनों को बुलाया जाएगा ताकि ज्यादा से ज्यादा निवेश लाया जा सके।
पर्यटन नीति और स्थानीय लोगों को फायदा
बिहार टूरिज्म पॉलिसी 2023 और ब्रांडिंग एंड मार्केटिंग पॉलिसी 2024 के तहत राज्य के पर्यटन को ग्लोबल लेवल पर ले जाने की कोशिश है। पर्यटन मंत्री Kedar Prasad Gupta ने अधिकारियों को इस नीति को सख्ती से लागू करने को कहा है। इस पहल से न केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण इलाकों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
बिहार में इकोटूरिज्म के लिए कितनी जगहों को चुना गया है
सरकार ने इकोटूरिज्म विकास के लिए राज्य के 27 डैम साइट्स और 247 तालाबों या जल निकायों की पहचान की है।
इन प्रोजेक्ट्स को किस मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा
इन प्रोजेक्ट्स को Build, Operate and Transfer (BOT) और Public-Private Partnership (PPP) मॉडल के जरिए निजी क्षेत्र की भागीदारी के साथ विकसित किया जाएगा।