Bihar: पूर्वी चंपारण के घोड़ासहन प्रखंड की विजयी पंचायत में मनरेगा और अन्य सरकारी योजनाओं में लाखों रुपये की धांधली सामने आई है। अमर उजाला की खबर के बाद प्रशासन ने जांच शुरू की, जिसमें कई परतें खुली हैं। इस गड़बड़ी के लि
Bihar: पूर्वी चंपारण के घोड़ासहन प्रखंड की विजयी पंचायत में मनरेगा और अन्य सरकारी योजनाओं में लाखों रुपये की धांधली सामने आई है। अमर उजाला की खबर के बाद प्रशासन ने जांच शुरू की, जिसमें कई परतें खुली हैं। इस गड़बड़ी के लिए कई अधिकारियों और कर्मियों को जिम्मेदार माना जा रहा है।
विजयी पंचायत में क्या गड़बड़ी हुई है?
घोड़ासहन प्रखंड के अंतर्गत आने वाली विजयी पंचायत में मनरेगा समेत कई योजनाओं में लाखों रुपये की अनियमितता पाई गई है। जांच में यह बात सामने आई कि सरकारी पैसों का इस्तेमाल सही तरीके से नहीं हुआ। इस मामले में स्थानीय अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही या मिलीभगत की बात कही जा रही है, जिससे सरकारी फंड का नुकसान हुआ है।
बिहार के अन्य जिलों में भी मनरेगा में धांधली
सिर्फ पूर्वी चंपारण ही नहीं, बल्कि बिहार के कई जिलों में मनरेगा में बड़े घोटाले सामने आए हैं। दरभंगा में करीब 2.5 करोड़ रुपये का घोटाला पकड़ा गया, जहां फर्जी जॉब कार्ड और नियमों के खिलाफ भुगतान किया गया। अररिया में 6 करोड़ रुपये के घोटाले के आरोप लगे हैं, जबकि मऊ और कटिहार में मजदूरों की जगह JCB मशीनों का इस्तेमाल कर खुदाई की गई, जो कि नियमों का सीधा उल्लंघन है। लतेहर में एक महिला के नाम पर फर्जी खाता खोलकर पैसे निकाले गए।
प्रशासन ने अब तक क्या कदम उठाए हैं?
पूर्वी चंपारण के DDC डॉ. प्रदीप कुमार ने समीक्षा बैठक कर लंबित कार्यों को जल्द पूरा करने और e-KYC में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने काम में लापरवाही बरतने वालों को चेतावनी दी है। वहीं, राज्य के अन्य हिस्सों में लोकपाल ने दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और रिकवरी के आदेश दिए हैं। कई वेंडरों को ब्लैकलिस्ट करने की सिफारिश भी की गई है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
पूर्वी चंपारण के विजयी पंचायत में क्या मामला है?
विजयी पंचायत में मनरेगा और अन्य सरकारी योजनाओं में लाखों रुपये की अनियमितता पाई गई है, जिसकी जांच के बाद कई अधिकारी और कर्मी जिम्मेदार पाए गए हैं।
बिहार के अन्य जिलों में मनरेगा घोटाले की क्या स्थिति है?
दरभंगा में 2.5 करोड़ और अररिया में 6 करोड़ के घोटाले की खबरें आई हैं। मऊ और कटिहार में मजदूरों के बजाय JCB का उपयोग कर नियमों को तोड़ा गया।