Bihar में ड्राइविंग लाइसेंस के लिए ट्रेनिंग सर्टिफिकेट जरूरी, अब बिना कोर्स के नहीं मिलेगा LMV लाइसेंस
Bihar: बिहार में अब मोटर साइकिल, कार और ऑटो रिक्शा चलाने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस पाना इतना आसान नहीं होगा। राज्य सरकार ने नियम बदल दिया है और अब लाइसेंस के लिए राज्य द्वारा मान्यता प्राप्त ड्राइविंग स्कूल से ट्रेनिंग सर
Bihar: बिहार में अब मोटर साइकिल, कार और ऑटो रिक्शा चलाने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस पाना इतना आसान नहीं होगा। राज्य सरकार ने नियम बदल दिया है और अब लाइसेंस के लिए राज्य द्वारा मान्यता प्राप्त ड्राइविंग स्कूल से ट्रेनिंग सर्टिफिकेट देना अनिवार्य होगा। यह फैसला सड़क हादसों को कम करने और नए ड्राइवरों को ट्रैफिक नियमों की सही जानकारी देने के लिए लिया गया है।
यह महत्वपूर्ण निर्णय मंगलवार, 23 जून 2026 को पटना के मुख्य सचिवालय सभागार में बिहार रोड सेफ्टी काउंसिल की बैठक के दौरान लिया गया। बैठक की अध्यक्षता परिवहन मंत्री दामोदर रावत ने की। इस नए नियम के तहत Light Motor Vehicle (LMV) श्रेणी के लाइसेंस के लिए आवेदन करने वालों को रजिस्टर्ड ड्राइविंग इंस्टीट्यूट से ट्रेनिंग लेनी होगी। इसके लिए परिवहन विभाग बिहार मोटर वाहन नियमों में जरूरी बदलाव करेगा।
परिवहन मंत्री दामोदर रावत ने कहा कि सड़क सुरक्षा के लिए प्रशिक्षित ड्राइवर सबसे मजबूत स्तंभ होते हैं और यह कदम दुर्घटनाओं को कम करने में मददगार होगा। वहीं परिवहन सचिव राज कुमार ने बताया कि विभाग अब केवल कागजी कार्रवाई के बजाय ट्रेनिंग आधारित मॉडल पर काम कर रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 50 प्रतिशत युवा आवेदक सड़क सुरक्षा नियमों और ट्रैफिक संकेतों की जानकारी न होने के कारण ड्राइविंग टेस्ट में फेल हो जाते हैं, जिसे देखते हुए यह अनिवार्य ट्रेनिंग जरूरी हो गई है।
इस व्यवस्था को लागू करने के लिए बिहार में बुनियादी ढांचे पर भी काम किया जा रहा है। वर्तमान में राज्य में 41 रजिस्टर्ड ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल चालू हैं। सरकार ने कुल 66 संस्थानों को मंजूरी दी है, जिनमें से बाकी 25 अभी बन रहे हैं और जल्द ही शुरू हो जाएंगे। इन केंद्रों पर आधुनिक सिम्युलेटर और ट्रेंड इंस्ट्रक्टर्स के जरिए प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दी जाएगी।
बैठक में परिवहन विभाग के अलावा सड़क निर्माण विभाग, ग्रामीण कार्य विभाग, गृह विभाग, स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग और NHAI के नोडल अधिकारी भी शामिल थे। इसके साथ ही, राज्य के सभी जिलों के लिए एक वार्षिक रोड सेफ्टी ट्रेनिंग कैलेंडर तैयार किया गया है। जिला प्रशासन को गाइडलाइंस भेज दी गई हैं ताकि सरकारी और निजी वाहन चलाने वालों के लिए नियमित ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किए जा सकें।