Bihar में डॉक्टरों की हड़ताल, अरवल सिविल सर्जन से मारपीट के विरोध में आज बंद रही OPD सेवाएं

Bihar: अरवल सदर अस्पताल में सिविल सर्जन के साथ हुई मारपीट के विरोध में आज पूरे बिहार के सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं बंद रहीं। बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ (भासा) ने इस राज्यव्यापी बहिष्कार का आह्वान किया था, जिससे इलाज

Bihar: अरवल सदर अस्पताल में सिविल सर्जन के साथ हुई मारपीट के विरोध में आज पूरे बिहार के सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं बंद रहीं। बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ (भासा) ने इस राज्यव्यापी बहिष्कार का आह्वान किया था, जिससे इलाज के लिए आए मरीजों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। हालांकि, अस्पतालों में इमरजेंसी सेवाएं और जरूरी जांचें सामान्य रूप से चलती रहीं।

पूरा मामला 17 जुलाई 2026 को शुरू हुआ जब अरवल सदर अस्पताल में रागिनी कुमारी नाम की एक गर्भवती महिला की सिजेरियन ऑपरेशन के बाद मौत हो गई। इस घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया और सिविल सर्जन डॉ. राज किशोर प्रसाद के साथ हाथापाई और मारपीट की, जिसमें वे घायल हो गए। पुलिस ने इस मामले में पूर्व विधायक महानंद सिंह समेत 12 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

डॉक्टरों का कहना है कि घटना के पांच दिन बीत जाने के बाद भी आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। भासा के महासचिव डॉ. रोहित कुमार ने बताया कि उन्होंने प्रशासन को 21 जुलाई तक का समय दिया था, लेकिन मांगें पूरी न होने पर आज ओपीडी बंद रखने का फैसला लिया गया। डॉक्टरों की मुख्य मांग है कि सभी दोषियों को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार किया जाए और सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए जाएं।

इस हड़ताल का असर मुंगेर और छपरा जैसे जिलों में भी देखा गया। मुंगेर सदर अस्पताल में 200 से ज्यादा मरीजों को बिना इलाज के लौटना पड़ा। छपरा में भी ओपीडी सेवाएं प्रभावित रहीं, जिसके बाद जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग को व्यवस्था सामान्य रखने के निर्देश दिए। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की बिहार शाखा ने भी इस मुद्दे पर पुलिस महानिदेशक (DGP) से मुलाकात की है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि अगर सुरक्षा व्यवस्था नहीं सुधरी तो आगे और बड़ा आंदोलन किया जाएगा।