Bihar के सभी जिला अस्पतालों में 7 दिन के अंदर ICU की सुविधा, अब मरीजों को रेफर करना होगा मुश्किल

Bihar: राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने जिला अस्पतालों की हालत सुधारने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। अब सभी जिला अस्पतालों में सात दिनों के अंदर ICU और 24 घंटे इमरजेंसी सेवा शुरू करना अनिवार्य कर दिया गया है। इस कदम का मुख्य

Bihar: राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने जिला अस्पतालों की हालत सुधारने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। अब सभी जिला अस्पतालों में सात दिनों के अंदर ICU और 24 घंटे इमरजेंसी सेवा शुरू करना अनिवार्य कर दिया गया है। इस कदम का मुख्य मकसद यह है कि मरीजों को छोटी-छोटी दिक्कतों के लिए बड़े शहरों या पटना रेफर न किया जाए और उन्हें स्थानीय स्तर पर ही इलाज मिल सके।

स्वास्थ्य विभाग ने साफ किया है कि अब बिना ठोस वजह के मरीजों को रेफर करना आसान नहीं होगा। डॉक्टरों को रेफरल के समय स्पष्ट कारण बताना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि जरूरी सुविधा उस अस्पताल में उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा, गंभीर मरीजों को रेफर करने से पहले उन्हें स्थिर करना होगा और सरकारी ALS/BLS एम्बुलेंस का ही इस्तेमाल करना होगा। मुख्यमंत्री Samrat Choudhary ने भी निर्देश दिया है कि 15 अगस्त के बाद पटना जाने वाले अनावश्यक रेफरल बंद होने चाहिए।

सिस्टम को पारदर्शी बनाने के लिए Bhavya पोर्टल का इस्तेमाल किया जाएगा। सभी डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को इस पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना होगा और अपनी ड्यूटी रोस्टर की ऑनलाइन एंट्री करनी होगी। मरीजों के इलाज की पूरी जानकारी, जैसे OPD, IPD और इमरजेंसी केस, अब डिजिटल रूप से दर्ज होंगे। भर्ती मरीजों के लिए ABHA ID बनाई जाएगी ताकि उनका इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड (EHR) तैयार रहे और भविष्य में इलाज में आसानी हो।

नया नियम विवरण
ICU और इमरजेंसी 7 दिन के अंदर सभी जिला अस्पतालों में शुरू होगा
Bhavya पोर्टल स्टाफ रजिस्ट्रेशन और ड्यूटी रोस्टर अनिवार्य
रेफरल सिस्टम बिना ठोस कारण रेफर करने पर कार्रवाई होगी
डिजिटल रिकॉर्ड ABHA ID के जरिए EHR बनाया जाएगा
स्पेशलिस्ट डॉक्टर जरूरत पड़ने पर ऑन-कॉल सिस्टम से बुलाए जाएंगे
इलाज की गति इमरजेंसी और ट्रॉमा केस के लिए Zero Delay Policy लागू

स्वास्थ्य मंत्री Nishant Kumar और स्वास्थ्य सचिव Kumar Ravi ने जिलाधिकारियों और सिविल सर्जनों को सख्त निर्देश दिए हैं कि स्थानीय चिकित्सा सुविधाओं को बेहतर बनाना उनकी जिम्मेदारी है। अगर कोई अधिकारी या डॉक्टर लापरवाही बरतता है या बिना वजह मरीज को रेफर करता है, तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।