Bihar में डिजिटल लर्निंग की हालत खराब, नालंदा पहले नंबर पर तो अररिया सबसे पीछे; शिक्षा मंत्रालय ने जारी की रिपोर्ट

Bihar: केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने स्कूली शिक्षा की स्थिति जानने के लिए Performance Grading Index (PGI) 2.0 रिपोर्ट 2025-26 जारी की है। इस रिपोर्ट में डिजिटल लर्निंग के मामले में बिहार के जिलों की पोल खुल गई है। राज्य के

Bihar: केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने स्कूली शिक्षा की स्थिति जानने के लिए Performance Grading Index (PGI) 2.0 रिपोर्ट 2025-26 जारी की है। इस रिपोर्ट में डिजिटल लर्निंग के मामले में बिहार के जिलों की पोल खुल गई है। राज्य के कई जिले इंटरनेट और कंप्यूटर जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में पिछड़ गए हैं, जबकि नालंदा जिला इस सूची में पहले स्थान पर रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, डिजिटल लर्निंग की जांच के लिए इंटरनेट सुविधा, कंप्यूटर-लैपटॉप की उपलब्धता, स्मार्ट क्लासरूम, बच्चों और कंप्यूटर का अनुपात और प्रशिक्षित शिक्षकों जैसे पांच मानकों को देखा गया। डिजिटल लर्निंग के लिए कुल 50 अंक रखे गए थे। बिहार के साथ-साथ पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और झारखंड के ज्यादातर जिले इस श्रेणी में 30 प्रतिशत अंक भी नहीं ला पाए हैं।

बिहार की बात करें तो डिजिटल लर्निंग में नालंदा जिला पहले नंबर पर और पटना चौथा रहा है, जबकि अररिया जिला सबसे पीछे है। हालांकि, अररिया में सुधार की कोशिशें शुरू हो गई हैं। 12 जुलाई 2026 को अररिया के राजकीय प्लस टू उच्च विद्यालय में जिले के पहले डिजिटल लर्निंग सेंटर का उद्घाटन किया गया, जहां अब बच्चों को डिजिटल बोर्ड के जरिए पढ़ाया जाएगा।

शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि बिहार लर्निंग और इक्विटी के मामले में तो बेहतर है, लेकिन स्कूलों में ICT लैब और स्मार्ट क्लासरूम जैसे बुनियादी ढांचे की भारी कमी है। देश के कुल 784 जिलों में से 327 जिले डिजिटल लर्निंग में पिछड़े हुए हैं। पूरे देश में चंडीगढ़ ने ‘उत्तम-3’ ग्रेड पाकर सबसे अच्छा प्रदर्शन किया है।

इस बीच, शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने विभाग की समीक्षा बैठक में सभी लंबित कार्यों को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, निगरानी ब्यूरो के डीजी जेएस गंगवार ने उन शिक्षकों की रिपोर्ट मांगी है जिनकी नियुक्ति गैर-मान्यता प्राप्त डिग्री के आधार पर हुई है। अगले हफ्ते केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की एक टीम बिहार का दौरा करेगी ताकि शिक्षा में सुधार और नए नवाचारों पर चर्चा की जा सके।