Bihar : बिहार का डिजिटल चुनाव मॉडल अब पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। इस सिस्टम में फेस रिकॉग्निशन और ई-वोटिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है, जिससे चुनाव प्रक्रिया सुरक्षित और पारदर्शी हुई है। इसी मॉड
Bihar : बिहार का डिजिटल चुनाव मॉडल अब पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। इस सिस्टम में फेस रिकॉग्निशन और ई-वोटिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है, जिससे चुनाव प्रक्रिया सुरक्षित और पारदर्शी हुई है। इसी मॉडल को बारीकी से समझने के लिए जम्मू-कश्मीर के राज्य निर्वाचन आयुक्त ने पटना का दौरा किया।
बिहार के डिजिटल चुनाव मॉडल में क्या खास है?
बिहार राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) ने शहरी स्थानीय निकाय चुनावों के लिए एक आधुनिक डिजिटल ढांचा तैयार किया है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), फेस रिकॉग्निशन सिस्टम (FRS) और ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य चुनाव को आसान बनाना है ताकि बुजुर्ग, दिव्यांग और प्रवासी मतदाता भी आसानी से वोट डाल सकें।
- ई-वोटिंग: ब्लॉकचेन सुरक्षा और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के जरिए घर बैठे वोट डालने की सुविधा।
- जीआईएस मैपिंग: मतदान केंद्रों की सटीक निगरानी और प्रबंधन के लिए।
- स्मार्ट वोटर आईडी: क्यूआर कोड और माइक्रोचिप वाले डिजिटल ई-ईपीआईसी कार्ड।
- डिजिटल लॉक: ईवीएम स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा के लिए डिजिटल लॉक का इस्तेमाल।
ई-वोटिंग और नई तकनीक कब से लागू हुई?
बिहार शहरी स्थानीय निकाय चुनावों के लिए ई-वोटिंग लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। 21 जून 2025 को इसे लागू किया गया और 27-28 जून 2025 को मतदाताओं ने मोबाइल ऐप के जरिए घर बैठे मतदान किया। सी-डैक ने इसके लिए ‘ई-वोटिंग एसईबीएचआर’ जैसे मोबाइल एप्लिकेशन विकसित किए हैं।
| महत्वपूर्ण तारीख |
घटनाक्रम |
| 21 जून 2025 |
ई-वोटिंग प्रणाली लागू करने वाला पहला राज्य बना बिहार |
| 3 सितंबर 2025 |
स्मार्ट वोटर आईडी और डिजिटल ई-ईपीआईसी कार्ड लॉन्च |
| 5 अक्टूबर 2025 |
भारत निर्वाचन आयोग की 16 सदस्यीय टीम ने तैयारियों की समीक्षा की |
| 28 अक्टूबर 2025 |
eSEC BAR मोबाइल ऐप की प्रस्तुति |
| फरवरी 2026 |
इंडिया एआई इंपैक्ट एक्सपो में मोबाइल ई-वोटिंग का प्रदर्शन |
मतदाताओं के लिए नियम और सुरक्षा क्या है?
बिहार राज्य निर्वाचन आयोग के मुताबिक ई-वोटिंग एक ऐच्छिक सुविधा है। केवल वही लोग इसका लाभ उठा सकते हैं जिन्होंने पहले इसके लिए रजिस्ट्रेशन कराया है। पहचान की पुष्टि के लिए आधिकारिक ऐप पर ओटीपी (OTP) प्रमाणीकरण का इस्तेमाल किया जाता है। साथ ही, चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों को चेतावनी दी है कि वे चुनाव में एआई (AI) टूल्स का गलत इस्तेमाल न करें।