Bihar : भागलपुर जिले के नवगछिया अनुमंडल स्थित धरहरा गांव इन दिनों अपनी एक खास परंपरा के लिए जाना जा रहा है। यहां बेटी के जन्म पर फलदार पौधे लगाने का रिवाज है, जिससे गांव में हरियाली भी बढ़ रही है और बेटियों को सम्मान भी
Bihar : भागलपुर जिले के नवगछिया अनुमंडल स्थित धरहरा गांव इन दिनों अपनी एक खास परंपरा के लिए जाना जा रहा है। यहां बेटी के जन्म पर फलदार पौधे लगाने का रिवाज है, जिससे गांव में हरियाली भी बढ़ रही है और बेटियों को सम्मान भी मिल रहा है। यह परंपरा पर्यावरण बचाने और समाज में बेटियों की स्थिति सुधारने का एक बड़ा उदाहरण बन गई है।
बेटी के जन्म पर पेड़ लगाने की क्या है परंपरा
धरहरा गांव में जब भी किसी घर में बेटी का जन्म होता है, तो परिवार कम से कम 10 फलदार पौधे लगाता है। इनमें ज्यादातर आम और लीची के पेड़ लगाए जाते हैं। इन पेड़ों से भविष्य में जो कमाई होती है, उसका इस्तेमाल बेटी की पढ़ाई और उसकी शादी के खर्चों के लिए किया जाता है। इस वजह से यहां बेटियों को आर्थिक बोझ नहीं माना जाता और दहेज जैसी कुरीतियों पर भी लगाम लगी है। गांव में अब तक ऐसे 20,000 से ज्यादा पेड़ लग चुके हैं।
सरकारी मान्यता और समाज पर असर
पूर्व मुख्यमंत्री Nitish Kumar इस परंपरा से काफी प्रभावित हुए और उन्होंने 2010 से 2013 के बीच कई बार गांव का दौरा किया। उन्होंने यहां ‘पहली किलकारी योजना’ की शुरुआत की और धरहरा को मॉडल गांव घोषित किया। इस पहल की चर्चा राष्ट्रीय स्तर पर हुई और इसे गणतंत्र दिवस की परेड में बिहार की झांकी में भी दिखाया गया। डाक विभाग ने भी इस गांव को पहला ‘सुकन्या गांव’ बनाने की प्रक्रिया शुरू की है ताकि लड़कियों के बैंक खाते खोले जा सकें।
गांव के लिंगानुपात और सुरक्षा में सुधार
इस सकारात्मक सोच का असर गांव के आंकड़ों में भी दिखता है। धरहरा में लिंगानुपात 1000 पुरुषों पर 957 महिलाएं है, जो भागलपुर जिले (879) और पूरे बिहार (933) के औसत से काफी बेहतर है। गांव में महिलाओं के खिलाफ उत्पीड़न के मामले भी नहीं मिलते हैं। यहां की बेटियों, जैसे लावी कुमारी और रिमू राज, जिनके नाम पर मुख्यमंत्री ने पेड़ लगाए थे, आज भी इस परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं और उम्मीद करती हैं कि मुख्यमंत्री दोबारा गांव आएंगे।
Frequently Asked Questions (FAQs)
धरहरा गांव में बेटी के जन्म पर कौन से पेड़ लगाए जाते हैं और क्यों?
यहां मुख्य रूप से आम और लीची जैसे फलदार पौधे लगाए जाते हैं। इन पेड़ों से होने वाली कमाई का उपयोग बेटी की शिक्षा और विवाह के खर्चों के लिए किया जाता है।
इस परंपरा का गांव के लिंगानुपात पर क्या असर पड़ा है?
इस परंपरा से बेटियों के प्रति सोच बदली है, जिससे यहां लिंगानुपात 1000 पुरुषों पर 957 महिलाएं तक पहुंच गया है, जो बिहार के औसत से अधिक है।