Bihar में 211 नए डिग्री कॉलेजों की शुरुआत टली, शिक्षकों की कमी और अधूरे बुनियादी ढांचे ने रोका रास्ता
Bihar: बिहार के ग्रामीण इलाकों में उच्च शिक्षा पहुंचाने के लिए शुरू की गई डिग्री कॉलेज योजना फिलहाल अटक गई है। सरकार ने 1 जुलाई 2026 से 211 नए कॉलेजों में पढ़ाई शुरू करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन अब इसे स्थगित कर दिया गया
Bihar: बिहार के ग्रामीण इलाकों में उच्च शिक्षा पहुंचाने के लिए शुरू की गई डिग्री कॉलेज योजना फिलहाल अटक गई है। सरकार ने 1 जुलाई 2026 से 211 नए कॉलेजों में पढ़ाई शुरू करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन अब इसे स्थगित कर दिया गया है। इस फैसले से उन हजारों छात्रों को झटका लगा है जो अपने ही ब्लॉक में स्नातक की पढ़ाई शुरू करने का इंतजार कर रहे थे।
यह योजना नीतीश कुमार सरकार के ‘सात निश्चय-3’ कार्यक्रम के ‘उन्नत शिक्षा, उन्नत भविष्य’ अभियान का हिस्सा है। इसका मुख्य मकसद उन प्रखंडों में कॉलेज खोलना था जहां कोई सरकारी डिग्री कॉलेज नहीं है। सरकार चाहती थी कि गरीब परिवारों की बेटियों और छात्रों को पढ़ाई के लिए बड़े शहरों में न जाना पड़े, जिससे ड्रॉपआउट रेट कम हो और पलायन रुके। इस योजना के तहत 9,284 नए पदों की मंजूरी मिली थी, जिनमें 6,752 शिक्षक और 2,532 गैर-शिक्षण कर्मचारी शामिल थे।
मामले में विवाद तब शुरू हुआ जब सरकार ने स्थायी शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए एक अंतरिम व्यवस्था का प्रस्ताव रखा। उच्च शिक्षा विभाग ने कक्षा 9 से 12 तक के उन शिक्षकों को डिग्री कॉलेजों में भेजने की योजना बनाई थी जिनके पास NET, JRF या PhD की डिग्री है। इस फैसले का शिक्षक संगठनों ने कड़ा विरोध किया। उनका कहना था कि स्कूल के शिक्षकों को कॉलेज भेजने से स्कूलों की पढ़ाई प्रभावित होगी। भारी विरोध के बाद सरकार को यह प्रस्ताव वापस लेना पड़ा।
सिर्फ शिक्षकों की कमी ही नहीं, बल्कि बुनियादी ढांचे की कमी भी एक बड़ी वजह बनी है। कई कॉलेजों में अब तक क्लासरूम, लैब, लाइब्रेरी और फर्नीचर जैसी जरूरी सुविधाएं तैयार नहीं हो पाई हैं। साथ ही, प्रशासनिक स्तर पर बार-बार बदलते फैसलों और राजभवन की आपत्तियों ने भी काम की रफ्तार धीमी कर दी। राजभवन ने शिक्षा विभाग के कुछ एकतरफा फैसलों पर अपनी नाराजगी जताई थी।
फिलहाल, उच्च शिक्षा निदेशक प्रो. एन.के. अग्रवाल ने बताया है कि नई कार्ययोजना पर काम चल रहा है और कोशिश है कि जुलाई के पहले हफ्ते में पढ़ाई शुरू हो सके। हालांकि, अब अंतिम तारीख मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की मंजूरी के बाद ही तय होगी। पश्चिमी चंपारण जैसे जिलों में भी इन्हीं कारणों से कॉलेजों की शुरुआत में देरी हुई है। अब छात्रों को स्थायी नियुक्तियों और बुनियादी सुविधाओं के पूरा होने का इंतजार करना होगा।