Bihar में मुख्यमंत्री प्रतिज्ञा योजना की सुस्त रफ्तार, 1.62 लाख रजिस्ट्रेशन के बाद सिर्फ 4 हजार युवाओं को मिला मौका

Bihar: राज्य के शिक्षित बेरोजगार युवाओं को काम का अनुभव और आर्थिक मदद देने के लिए शुरू की गई मुख्यमंत्री प्रतिज्ञा योजना उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं दे पा रही है। योजना में रजिस्ट्रेशन कराने वाले युवाओं की संख्या तो बहु

Bihar: राज्य के शिक्षित बेरोजगार युवाओं को काम का अनुभव और आर्थिक मदद देने के लिए शुरू की गई मुख्यमंत्री प्रतिज्ञा योजना उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं दे पा रही है। योजना में रजिस्ट्रेशन कराने वाले युवाओं की संख्या तो बहुत ज्यादा है, लेकिन उन्हें असल में इंटर्नशिप मिलने की रफ्तार काफी धीमी है। इस वजह से बड़ी संख्या में युवा अब भी अपने मौके का इंतजार कर रहे हैं।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 7 जुलाई 2026 तक इस योजना के लिए 1 लाख 62 हजार से ज्यादा युवाओं ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इनमें से अब तक केवल 4 हजार युवाओं को ही इंटर्नशिप मिल पाई है। इस योजना का मुख्य मकसद युवाओं की रोजगार क्षमता को बढ़ाना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि उन्हें सरकारी और निजी संस्थानों में व्यावहारिक अनुभव मिल सके।

योजना के तहत अब तक कुल 247 कंपनियों और संस्थानों ने अपना पंजीकरण कराया है। इनमें 69 निजी कंपनियां और 178 सरकारी विभाग शामिल हैं। श्रम संसाधन विभाग के सचिव दीपक आनंद ने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में सरकार ने 5,000 युवाओं को इंटर्नशिप कराने का लक्ष्य रखा है।

योजना की पात्रता और मिलने वाली राशि

इस योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक का बिहार का स्थायी निवासी होना जरूरी है और उसकी उम्र 18 से 28 वर्ष के बीच होनी चाहिए। शैक्षणिक योग्यता में 12वीं पास, आईटीआई, पॉलिटेक्निक डिप्लोमा, स्नातक या स्नातकोत्तर डिग्री मांगी गई है।

योग्यता मासिक मानदेय (Stipend)
12वीं पास ₹4,000
आईटीआई/डिप्लोमा ₹5,000
स्नातक/स्नातकोत्तर ₹6,000

इसके अलावा, अगर कोई युवा अपने गृह जिले से बाहर इंटर्नशिप करता है, तो उसे पहले तीन महीने के लिए ₹2,000 अतिरिक्त मिलेंगे। वहीं, राज्य से बाहर इंटर्नशिप करने वालों को अधिकतम तीन महीने के लिए ₹5,000 की अतिरिक्त सहायता दी जाएगी। यह पूरा भुगतान सीधे बैंक खाते में DBT के जरिए किया जाता है।

पिछले आंकड़ों पर नजर डालें तो दिसंबर 2025 में आईटी सेक्टर के युवाओं ने सबसे ज्यादा रुचि दिखाई थी, जिनका हिस्सा लगभग 70 प्रतिशत था। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी कंपनी में 86 आईटी डिप्लोमाधारी लड़कियों का चयन भी हुआ था, जिन्हें कंपनी की तरफ से अलग से स्टाइपेंड मिला था।