Bihar के छपरा में BDO पर हमले के बाद बवाल, सुरक्षा की मांग को लेकर काली पट्टी बांधकर काम कर रहे अधिकारी

Bihar/Chhapra: छपरा में ड्यूटी के दौरान प्रखंड विकास पदाधिकारियों (BDO) पर हुए जानलेवा हमले के बाद अब अधिकारियों में भारी गुस्सा है। बिहार ग्रामीण विकास सेवा संघ के आह्वान पर राज्यभर के BDO काली पट्टी बांधकर अपना काम कर

Bihar/Chhapra: छपरा में ड्यूटी के दौरान प्रखंड विकास पदाधिकारियों (BDO) पर हुए जानलेवा हमले के बाद अब अधिकारियों में भारी गुस्सा है। बिहार ग्रामीण विकास सेवा संघ के आह्वान पर राज्यभर के BDO काली पट्टी बांधकर अपना काम कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जब तक उनकी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं होते, यह सांकेतिक विरोध जारी रहेगा।

यह पूरा मामला 25 जुलाई 2026 को शुरू हुआ, जब NEET परीक्षा पेपर लीक के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान विधि-व्यवस्था संभाल रहे अधिकारियों पर हमला हुआ। रिविलगंज ब्लॉक के BDO रितेश कुमार सिंह पर लोहे के बांट से हमला किया गया, जिससे उनके सिर में गंभीर चोट आई और खोपड़ी में फ्रैक्चर हो गया। उनका इलाज पटना के Medanta अस्पताल में चल रहा है। वहीं, सदर ब्लॉक की BDO दृष्टि पाठक भी गंभीर रूप से घायल हुईं, जिससे उनकी एक आंख की रोशनी जाने की खबर है। उनका इलाज IGIMS पटना में चल रहा है।

इस घटना के विरोध में 27 जुलाई से BDO संघ ने राज्यव्यापी प्रदर्शन शुरू किया है। छौड़ादानों प्रखंड कार्यालय में भी स्थानीय BDO सुनील कुमार मिश्रा ने काली पट्टी बांधकर विरोध जताया। अधिकारियों ने मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपकर अपनी सुरक्षा के लिए कई मांगें रखी हैं। उन्होंने मांग की है कि हमलावरों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और हर BDO के साथ कम से कम दो प्रशिक्षित सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएं। साथ ही, दंगा हेलमेट, शील्ड और बॉडी प्रोटेक्टर जैसे सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है। संघ ने यह भी कहा है कि ड्यूटी के दौरान घायल होने पर सरकारी खर्च पर इलाज और बीमा की स्पष्ट नीति होनी चाहिए।

बिहार पुलिस मुख्यालय के मुताबिक, 25 जुलाई को हुए बवाल के दौरान राज्यभर में 694 लोगों को हिरासत में लिया गया और 355 लोगों पर कानूनी कार्रवाई की गई है। इस हिंसा में 91 पुलिसकर्मी और 13 आम नागरिक घायल हुए, जबकि कई सरकारी गाड़ियों को नुकसान पहुंचाया गया। BDO संघ ने छपरा में कानून-व्यवस्था संभालने में नाकाम रहे जिलाधिकारी और उप विकास आयुक्त की जवाबदेही तय करने की मांग की है।