Bihar : चंपारण के मोतिहारी और बेतिया जिलों में उगने वाला जर्दालू आम अब आधिकारिक तौर पर GI टैग प्राप्त कर चुका है। यह आम अपनी तेज खुशबू और बेहद मीठे स्वाद के कारण पूरे बिहार में मशहूर है। मई-जून के मौसम में यह बाजारों में
Bihar : चंपारण के मोतिहारी और बेतिया जिलों में उगने वाला जर्दालू आम अब आधिकारिक तौर पर GI टैग प्राप्त कर चुका है। यह आम अपनी तेज खुशबू और बेहद मीठे स्वाद के कारण पूरे बिहार में मशहूर है। मई-जून के मौसम में यह बाजारों में आता है और अपनी अनोखी सुगंध से लोगों को अपनी ओर खींचता है।
जर्दालू आम की क्या है खासियत
इस आम का नाम जर्दा से लिया गया है क्योंकि इसकी खुशबू पान में इस्तेमाल होने वाले जर्दे जैसी होती है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह कच्चा होने पर भी हल्का मीठा लगता है और पकने के बाद इसका स्वाद और बढ़ जाता है। इसकी खुशबू इतनी तेज होती है कि अगर एक आम कमरे में रखा जाए, तो पूरे कमरे में उसकी महक फैल जाती है।
GI टैग और बाजार की स्थिति
बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस आम की विशिष्टता को देखते हुए इसके लिए GI टैग की पहल की थी, जो अब इसे मिल चुका है। यह टैग इसकी खास पहचान को प्रमाणित करता है। स्थानीय फल विक्रेता एम. हसन के मुताबिक, यह आम जून की शुरुआत से अंत तक बाजार में उपलब्ध रहता है और इसकी कीमत करीब 50 से 60 रुपये प्रति किलो तक रहती है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
जर्दालू आम मुख्य रूप से बिहार के किन जिलों में पाया जाता है
यह आम मुख्य रूप से चंपारण क्षेत्र के मोतिहारी और बेतिया जिलों में उगाया जाता है और स्थानीय लोग इसे चंपारण की शान मानते हैं।
जर्दालू आम को GI टैग मिलने का क्या मतलब है
GI टैग मिलने का मतलब है कि इस आम की भौगोलिक पहचान और विशिष्ट गुणों को आधिकारिक मान्यता मिल गई है, जिससे इसकी अंतरराष्ट्रीय पहचान बढ़ेगी।