Bihar: मुख्यमंत्री Samrat Chaudhary की अगुवाई वाली बिहार कैबिनेट ने राज्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने 12,000 करोड़ रुपये की लागत वाली गंगा-नारायणी परियोजना को मंजूरी दे दी है। इ
Bihar: मुख्यमंत्री Samrat Chaudhary की अगुवाई वाली बिहार कैबिनेट ने राज्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने 12,000 करोड़ रुपये की लागत वाली गंगा-नारायणी परियोजना को मंजूरी दे दी है। इस प्रोजेक्ट के तहत लगभग 163 किलोमीटर लंबी सड़कों का जाल बिछाया जाएगा, जिससे सारण, गोपालगंज, भोजपुर और बक्सर जैसे जिलों के लोगों का सफर आसान हो जाएगा।
गंगा-नारायणी प्रोजेक्ट में क्या-क्या बनेगा?
इस पूरी योजना को तीन मुख्य हिस्सों में बांटा गया है। पहला ‘नारायणी पथ’ है, जो सारण के दरिहारा (कोनहुआ) से गोपालगंज के डुमरिया घाट तक 73.51 किलोमीटर लंबा फोरलेन ग्रीनफील्ड रोड होगा। यह रास्ता सोनपुर के हरिहरनाथ मंदिर और प्रस्तावित नए एयरपोर्ट को जोड़ेगा। दूसरा ‘विश्वमित्रा पथ’ है, जो बक्सर से आरा-मानेर-कोइल्वर तक गंगा नदी के किनारे 90 किलोमीटर लंबा होगा और पटना के JP गंगा पथ से जुड़ जाएगा। तीसरा ‘अम्बिका पथ’ है, जिसके तहत गया जिले में फल्गु नदी पर 113.84 करोड़ की लागत से एक RCC ब्रिज और एप्रोच रोड बनाया जाएगा।
सड़कों का निर्माण कैसे होगा और किसे होगा फायदा?
इन सड़कों का निर्माण PPP मॉडल (DBFOT) के तहत किया जाएगा। इसका मतलब है कि निजी कंपनियां इन सड़कों को डिजाइन करेंगी, बनाएंगी और टोल के जरिए अपनी लागत वसूलेंगी। राज्य सरकार जमीन और अन्य जरूरी संसाधन उपलब्ध कराएगी। इस प्रोजेक्ट से न केवल यात्रा का समय कम होगा, बल्कि स्थानीय व्यापार और कनेक्टिविटी में भी बड़ा सुधार आएगा। यह फैसला कैबिनेट की उस बैठक में लिया गया जिसमें कुल 63-64 प्रस्तावों पर मुहर लगी थी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
गंगा-नारायणी परियोजना की कुल लागत और लंबाई कितनी है?
इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत 12,000 करोड़ रुपये है और इसके तहत कुल 163.51 किलोमीटर लंबी सड़कों और पुलों का निर्माण किया जाएगा।
इस प्रोजेक्ट से कौन-कौन से जिले लाभान्वित होंगे?
मुख्य रूप से सारण, गोपालगंज, भोजपुर, बक्सर और गया जिले के लोग इस प्रोजेक्ट से लाभान्वित होंगे, जिससे उनकी कनेक्टिविटी बेहतर होगी।