Bihar: भोजपुर के भरत तिवारी मौत मामले में BHRC का फैसला, माता-पिता को मिलेगा अंतरिम मुआवजा
Bihar: भोजपुर जिले के शाहपुर इलाके में पुलिस एनकाउंटर के दौरान मारे गए 28 साल के भरत भूषण तिवारी के परिवार को बड़ी राहत मिली है। बिहार मानवाधिकार आयोग (BHRC) ने मानवीय आधार पर मृतक के माता-पिता को अंतरिम मुआवजा देने का न
Bihar: भोजपुर जिले के शाहपुर इलाके में पुलिस एनकाउंटर के दौरान मारे गए 28 साल के भरत भूषण तिवारी के परिवार को बड़ी राहत मिली है। बिहार मानवाधिकार आयोग (BHRC) ने मानवीय आधार पर मृतक के माता-पिता को अंतरिम मुआवजा देने का निर्देश दिया है। यह आदेश आयोग ने तब जारी किया जब मामला अभी जांच के दायरे में है।
BHRC के चेयरमैन जस्टिस ए.एम. बदर ने प्रोटेक्शन ऑफ ह्यूमन राइट्स एक्ट, 1993 की धारा 18(c) के तहत यह फैसला सुनाया। आयोग ने साफ किया कि यह मुआवजा केवल मानवीय आधार पर दिया जा रहा है और इसका मतलब यह नहीं है कि सरकार या पुलिस ने अपनी गलती मान ली है। फिलहाल पुलिस और न्यायिक जांच दोनों जारी हैं, इसलिए इस स्तर पर किसी को दोषी ठहराना जल्दबाजी होगी।
इस मामले में बिहार सरकार की तरफ से एडीजी (कानून व्यवस्था) पेश हुए थे। उन्होंने आयोग को बताया कि अलग-अलग विभागों से जानकारी जुटाई जा रही है और जांच चल रही है। सरकार ने विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा था, जिसे आयोग ने स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई 3 अगस्त 2026 तय की है।
भरत भूषण तिवारी के परिवार और गांव वालों ने पुलिस के दावे को गलत बताया है। उनका कहना है कि भरत ने सरेंडर करने की बात मान ली थी, फिर भी उन्हें गोली मार दी गई। इस घटना के बाद से ही इलाके में काफी तनाव था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी यह बात सामने आई कि मौत गोली लगने से हुए भारी रक्तस्राव और शॉक की वजह से हुई।
इस केस में अब तक कई बड़े कदम उठाए जा चुके हैं। स्थानीय एसएचओ और एसडीपीओ समेत चार पुलिसकर्मियों पर हत्या का मामला दर्ज हुआ है और उन्हें सस्पेंड कर दिया गया है। रिटायर्ड जस्टिस विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में एक न्यायिक जांच आयोग भी काम कर रहा है, जिसने मृतक के माता-पिता काशीनाथ तिवारी और आशा देवी से मुलाकात की है।
वहीं, इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की गई थी, लेकिन कोर्ट ने सीबीआई जांच की मांग को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता को पटना हाई कोर्ट जाने की सलाह दी। अब सभी की नजरें 3 अगस्त को सरकार द्वारा दिए जाने वाले जवाब पर टिकी हैं।