Bihar के भोजपुर में भरत तिवारी एनकाउंटर के खिलाफ कैंडल मार्च, न्याय के लिए सवर्ण संगठनों ने खोला मोर्चा

Bihar/Bhojpur: भोजपुर जिले के भगवानपुर और शाहपुर इलाके में भरत तिवारी की मौत के बाद माहौल काफी तनावपूर्ण है. 17 जून 2026 को हुए कथित एनकाउंटर के विरोध में सवर्ण अधिकार मोर्चा और कई अन्य सामाजिक संगठनों ने कैंडल मार्च निक

Bihar/Bhojpur: भोजपुर जिले के भगवानपुर और शाहपुर इलाके में भरत तिवारी की मौत के बाद माहौल काफी तनावपूर्ण है. 17 जून 2026 को हुए कथित एनकाउंटर के विरोध में सवर्ण अधिकार मोर्चा और कई अन्य सामाजिक संगठनों ने कैंडल मार्च निकाला है. लोग इस घटना को फर्जी बता रहे हैं और सरकार से निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं.

पुलिस का कहना है कि बिलौटी गांव में छापेमारी के दौरान भरत तिवारी ने फायरिंग की थी, जिसके जवाब में वह मारा गया. लेकिन परिवार और ग्रामीणों का दावा है कि भरत ने फेसबुक लाइव के दौरान हथियार फेंककर सरेंडर कर दिया था, जिसके बाद उसे गोली मारी गई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी शरीर पर पांच गोलियां लगने की बात सामने आई है. इस घटना के बाद लोगों ने आरा-बक्सर फोरलेन जाम कर अपना गुस्सा जाहिर किया था.

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज से न्यायिक जांच कराने का आदेश दिया है. साथ ही 27 जून 2026 को एक न्यायिक आयोग के गठन का भी फैसला लिया गया. बिहार के एडीजी (कानून व्यवस्था) सुधांशु कुमार ने माना है कि इस पूरे मामले को संभालने में पुलिस से चूक हुई है और एनकाउंटर कोई उपलब्धि नहीं होती है.

इस मामले में कानूनी कार्रवाई भी शुरू हो गई है. भरत तिवारी की मां आशा देवी की शिकायत पर जगदीशपुर SDPO और शाहपुर थाना के तत्कालीन SHO समेत कई पुलिसकर्मियों पर हत्या का केस दर्ज किया गया है. जगदीशपुर के SDPO राजेश कुमार को उनके पद से हटा दिया गया है. वहीं, सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका भी दायर हुई है, जिसमें सीबीआई जांच की मांग की गई है.

इस मुद्दे पर अब राजनीतिक और धार्मिक हस्तियां भी सामने आ गई हैं. बागेश्वर धाम के आचार्य धीरेंद्र शास्त्री और शंकराचार्य स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इस एनकाउंटर को गलत बताया है. जन सुराज के प्रशांत किशोर और राजद नेता तेजस्वी यादव ने भी इसे फर्जी एनकाउंटर करार देते हुए सरकार पर निशाना साधा है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने इसे संगठित गिरोह जैसा काम बताया है और विधानसभा की सर्वदलीय समिति से जांच की मांग की है.