Bihar के भोजपुर में भरत तिवारी एनकाउंटर पर बवाल, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पुलिस के दावों की खुली पोल

Bihar/Bhojpur: भोजपुर जिले में 17 जून 2026 को हुए भरत तिवारी एनकाउंटर केस में एक नया मोड़ आया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद पुलिस की ‘आत्मरक्षा में फायरिंग’ वाली कहानी अब संदिग्ध नजर आ रही है। रिपोर्ट मे

Bihar/Bhojpur: भोजपुर जिले में 17 जून 2026 को हुए भरत तिवारी एनकाउंटर केस में एक नया मोड़ आया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद पुलिस की ‘आत्मरक्षा में फायरिंग’ वाली कहानी अब संदिग्ध नजर आ रही है। रिपोर्ट में ऐसी बातें सामने आई हैं जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, भरत तिवारी के शरीर पर पांच गोलियों के निशान मिले हैं, जबकि पहले केवल तीन गोलियों की बात कही जा रही थी। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सभी गोलियां कमर के नीचे, मुख्य रूप से जांघों और पैरों में लगी थीं। यह बात पुलिस की उस FIR के बिल्कुल उलट है, जिसमें STF और तत्कालीन स्टेशन ऑफिसर राजेश मलाकर ने आत्मरक्षा में फायरिंग की बात कही थी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इसे उच्च स्तरीय न्यायिक आयोग को सौंप दिया है। मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि इस मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा। इस केस में तत्कालीन जगदीशपुर SDPO राजेश कुमार शर्मा और शाहपुर SHO राजेश मलाकर समेत छह पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है। इन अधिकारियों पर IPC की धारा 302 (हत्या) और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।

जांच के लिए रिटायर्ड पटना हाईकोर्ट जस्टिस विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में एक न्यायिक आयोग बनाया गया है, जिन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात की है। इसके साथ ही राज्य मानवाधिकार आयोग भी इस मामले की जांच कर रहा है और 13 जुलाई को अगली सुनवाई तय की गई है।

दूसरी तरफ, भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी और मां आशा देवी ने पुलिस की जांच पर भरोसा जताने से इनकार कर दिया है। परिवार ने इस मामले की CBI जांच और सुप्रीम कोर्ट के किसी पूर्व जज की निगरानी में स्वतंत्र कमेटी बनाने की मांग की है। स्थानीय लोगों में भरत तिवारी के प्रति काफी सहानुभूति है, जिसके चलते बिलौटी गांव के लोग उनकी याद में एक नई बस्ती का नाम ‘भरत नगर’ रखने का विचार कर रहे हैं।