Bihar के भोजपुर में भरत तिवारी एनकाउंटर पर बवाल, सीबीआई जांच की मांग और 5 पुलिसकर्मी निलंबित
Bihar/Bhojpur: भोजपुर जिले के बिलौटी गांव के सामाजिक कार्यकर्ता भरत भूषण तिवारी की पुलिस मुठभेड़ में मौत का मामला अब गहराता जा रहा है। पुलिस इसे आत्मरक्षा में की गई फायरिंग बता रही है, जबकि परिवार और चश्मदीदों का दावा है
Bihar/Bhojpur: भोजपुर जिले के बिलौटी गांव के सामाजिक कार्यकर्ता भरत भूषण तिवारी की पुलिस मुठभेड़ में मौत का मामला अब गहराता जा रहा है। पुलिस इसे आत्मरक्षा में की गई फायरिंग बता रही है, जबकि परिवार और चश्मदीदों का दावा है कि यह एक फर्जी एनकाउंटर था। इस मामले में अब न्यायिक जांच और अदालती कार्यवाही शुरू हो गई है।
घटना 17 जून 2026 को हुई थी। पुलिस का कहना है कि भरत तिवारी के पास अवैध हथियार थे और उन्होंने पुलिस टीम पर फायरिंग की, जिसके बाद जवाब में गोलियां चलाई गईं। दूसरी तरफ, परिवार का आरोप है कि तिवारी ने हथियार फेंककर सरेंडर कर दिया था, फिर भी उन्हें गोली मार दी गई। इस दावे को मजबूती देने वाला एक फेसबुक लाइव वीडियो भी सामने आया है, जिसमें तिवारी को अपना हथियार फेंकते हुए देखा जा सकता है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर भी विरोधाभास है। रिपोर्ट में पैरों में दो गोलियां लगने की बात कही गई है, लेकिन प्राथमिक इलाज करने वाले डॉक्टरों ने 4-5 गोलियां लगने का जिक्र किया था। इस पूरे मामले में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 20 जून को एक रिटायर्ड हाई कोर्ट जज की अध्यक्षता में न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं।
प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई करते हुए एडीजी (कानून व्यवस्था) सुधांशु कुमार ने माना कि 16 जून को पुलिस टीम स्थिति संभालने में नाकाम रही थी। लापरवाही के चलते एक एसएचओ, दो सब-इंस्पेक्टर, एक एएसआई और एक कांस्टेबल सहित कुल पांच पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है।
वर्तमान स्थिति यह है कि भरत तिवारी की मां आशा देवी ने सीबीआई जांच की मांग को लेकर पटना हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को रजिस्ट्रार के पास जाने को कहा है। वहीं, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी इस मामले का संज्ञान लिया है और राज्य मानवाधिकार आयोग ने अगली सुनवाई 13 जुलाई को तय की है।
इस मामले में पुलिस ने कई एफआईआर भी दर्ज की हैं। भरत तिवारी के खिलाफ अवैध हथियार और फायरिंग के आरोप लगाए गए हैं, जबकि उनके पिता और भाई पर संरक्षण देने का मामला दर्ज है। इसके अलावा, मुठभेड़ के विरोध में सड़क जाम करने वाले 14 नामजद और 50 से ज्यादा अज्ञात लोगों पर भी केस दर्ज किया गया है। पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे और कुछ वरिष्ठ नेताओं ने भी वीडियो सबूतों के आधार पर इसे फर्जी मुठभेड़ बताया है।