Bihar के भोजपुर में भरत तिवारी केस पर बवाल, परशुराम सेना ने निकाला कैंडल मार्च, न्यायिक जांच के आदेश

Bihar/Bhojpur: भोजपुर जिले में भरत तिवारी की मौत के बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। परशुराम सेना ने रमपुरवा से चौकी चौराहे तक एक विशाल कैंडल मार्च निकाला जिसमें सैकड़ों लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में मोमबत्

Bihar/Bhojpur: भोजपुर जिले में भरत तिवारी की मौत के बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। परशुराम सेना ने रमपुरवा से चौकी चौराहे तक एक विशाल कैंडल मार्च निकाला जिसमें सैकड़ों लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में मोमबत्तियां लेकर भरत तिवारी के लिए न्याय की मांग की और बिहार पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

यह पूरा मामला 17 जून 2026 को हुए एक कथित पुलिस एनकाउंटर से जुड़ा है। हाल ही में 27 जून को सामने आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने इस मामले को और उलझा दिया है, क्योंकि रिपोर्ट में शरीर पर पांच गोलियों के निशान मिले हैं। इससे पहले पुलिस ने कम गोलियां चलने की बात कही थी। इसी बीच एक फेसबुक लाइव वीडियो भी चर्चा में है जिसमें दावा किया गया कि भरत तिवारी ने सरेंडर करने से पहले अपनी पिस्टल फेंक दी थी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की है कि इस घटना की जांच के लिए एक न्यायिक आयोग बनाया जाएगा। इस आयोग की अध्यक्षता हाई कोर्ट के एक रिटायर्ड जज करेंगे। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जो अधिकारी 30 दिनों के भीतर आवेदनों पर कार्रवाई नहीं करेंगे, उन्हें 31वें दिन सस्पेंड कर दिया जाएगा।

इस बीच परिवार और पुलिस के बीच तनाव भी बढ़ा है। भरत तिवारी की मां आशा देवी ने भोजपुर SP राज पर आरोप लगाया कि उन पर मीडिया से बात न करने का दबाव बनाया गया और धमकी दी गई। हालांकि SP ने इन आरोपों को पूरी तरह गलत बताया है। वहीं, एक पुलिस कॉन्स्टेबल को सस्पेंड कर दिया गया है, जो भरत तिवारी का चचेरा भाई था और उसने एक वीडियो में बदला लेने की धमकी दी थी।

परशुराम सेना और अन्य समर्थक अब इस मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनकी मांगों में परिवार को 10 करोड़ रुपये का मुआवजा, सरकारी नौकरी और दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त एक्शन शामिल है। पुलिस ने पहले ही इस मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में दो ASI और दो अन्य पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया है।