Bihar के भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में गरमाई सियासत, जन सुराज ने की न्यायिक जांच की मांग

Bhagalpur: बिहार के भागलपुर में भरत तिवारी की पुलिस मुठभेड़ में मौत का मामला अब राजनीतिक मोड़ ले चुका है। जन सुराज पार्टी ने इस घटना को लेकर सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी ने इस पूरे मामले की

Bhagalpur: बिहार के भागलपुर में भरत तिवारी की पुलिस मुठभेड़ में मौत का मामला अब राजनीतिक मोड़ ले चुका है। जन सुराज पार्टी ने इस घटना को लेकर सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है, ताकि सच सामने आ सके।

इस मामले में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी है कि अगर किसी आवेदन पर 30 दिनों के भीतर आदेश नहीं आया, तो 31वें दिन संबंधित अधिकारी को सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय से निलंबित कर दिया जाएगा।

घटना की गंभीरता को देखते हुए अब तक चार पुलिस अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है। भरत तिवारी की मां की शिकायत पर शाहपुर के थानाध्यक्ष राजेश मालाकार और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज हुई है। हालांकि, वरिष्ठ अधिकारियों की समीक्षा के बाद भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी और भाई चंदन तिवारी का नाम FIR से हटा दिया गया है क्योंकि उनके खिलाफ आरोप सही नहीं पाए गए।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि भरत तिवारी को कुल पांच गोलियां लगी थीं, जिनमें से चार जांघ में और एक बाएं पैर में थी। वहीं जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश के बजाय कार्यरत न्यायाधीश की निगरानी में जांच कराने की मांग की है। उन्होंने गृह विभाग, एसटीएफ और पुलिस महानिदेशक की भूमिका की जांच की बात कही है और 15 दिनों में कार्रवाई न होने पर मुख्यमंत्री आवास के घेराव की चेतावनी दी है।

इस मामले में अलग-अलग राय सामने आ रही हैं। पूर्व डीजीपी अभयानंद ने इसे मुठभेड़ के बजाय हत्या बताया है, जबकि मंत्री श्रवण कुमार ने विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस को आत्मरक्षा में कार्रवाई का हक है। फिलहाल मानवाधिकार आयोग ने जवाब मांगा है और सर्वोच्च न्यायालय में भी याचिका दायर की गई है। सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उन्हें न्याय का भरोसा दिया है और छह महीने में रिपोर्ट सौंपने की बात कही है।