Bihar: भागलपुर के जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल (JLNMCH) के डॉक्टरों ने लोगों से एक खास अपील की है। उन्होंने कहा है कि शादी तय करते समय सिर्फ कुंडली ही नहीं, बल्कि थैलेसीमिया की जांच रिपोर्ट का मिलान भी जरूर करें।
Bihar: भागलपुर के जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल (JLNMCH) के डॉक्टरों ने लोगों से एक खास अपील की है। उन्होंने कहा है कि शादी तय करते समय सिर्फ कुंडली ही नहीं, बल्कि थैलेसीमिया की जांच रिपोर्ट का मिलान भी जरूर करें। यह कदम इसलिए जरूरी है ताकि आने वाली पीढ़ी को इस गंभीर और वंशानुगत बीमारी से बचाया जा सके।
थैलेसीमिया जांच क्यों है जरूरी और कैसे फैलता है यह रोग
डॉक्टरों के मुताबिक, यह बीमारी माता-पिता से बच्चों में जीन के जरिए फैलती है। अगर शादी करने वाले दोनों पार्टनर ‘थैलेसीमिया माइनर’ के वाहक हैं, तो उनके बच्चे को ‘थैलेसीमिया मेजर’ होने का 25% जोखिम रहता है। इस बीमारी से पीड़ित बच्चों को जीवनभर नियमित रूप से खून चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। जेएलएनएमसीएच भागलपुर के शिशु रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. अंकुर प्रियदर्शी ने इस जांच को अनिवार्य मानने की सलाह दी है।
JLNMCH भागलपुर में इलाज और सरकारी सुविधाएं
भागलपुर के जेएलएनएमसीएच अस्पताल में एक विशेष थैलेसीमिया डे-केयर सेंटर चल रहा है। यहाँ हर महीने 300 से ज्यादा मरीजों को रक्त उपलब्ध कराया जाता है। गंभीर मरीजों को हर तीन हफ्ते में खून चढ़ाना जरूरी होता है। अस्पताल में ल्यूको फिल्टर का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे खून चढ़ाने के बाद होने वाले साइड इफेक्ट्स 20% से घटकर अब सिर्फ 2% से 2.5% रह गए हैं। सरकार यहाँ मरीजों को मुफ्त दवाएं और अन्य सुविधाएं भी दे रही है।
मुख्यमंत्री बाल थैलेसीमिया योजना और अन्य लाभ
बिहार सरकार 12 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए ‘मुख्यमंत्री बाल थैलेसीमिया योजना’ चला रही है। इसके तहत अगर बच्चे का HLA मैच होता है, तो CMC Vellore में बोन मैरो ट्रांसप्लांट (BMT) के लिए 15 लाख रुपये तक की मदद दी जाती है। इसमें हवाई यात्रा, रहने और खाने का खर्च भी शामिल है। इसके अलावा, भारत सरकार के RPWD एक्ट 2016 के तहत अब थैलेसीमिया को दिव्यांगता की श्रेणी में रखा गया है, जिससे मरीजों को शिक्षा और इलाज में आरक्षण व सरकारी मदद मिल सकती है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
थैलेसीमिया माइनर और मेजर में क्या अंतर है?
थैलेसीमिया माइनर एक वाहक स्थिति है जिसमें व्यक्ति स्वस्थ रहता है लेकिन जीन आगे भेज सकता है। यदि दोनों माता-पिता माइनर हैं, तो बच्चे में थैलेसीमिया मेजर होने का खतरा रहता है, जिसमें बच्चे को नियमित खून चढ़ाने की जरूरत होती है।
मुख्यमंत्री बाल थैलेसीमिया योजना का लाभ कैसे मिलता है?
यह योजना 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए है। यदि बच्चे का HLA अपने भाई या बहन से मैच करता है, तो CMC Vellore में बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए सरकार 15 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान करती है।