Bihar: बिहार सरकार ने बेतिया राज की संपत्तियों को अवैध कब्जे से मुक्त कराने के लिए बड़ा अभियान शुरू किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में सरकार ने जमीन के रिकॉर्ड्स की स्कैनिंग और डिजिटलीकरण का काम शुरू कर दिय
Bihar: बिहार सरकार ने बेतिया राज की संपत्तियों को अवैध कब्जे से मुक्त कराने के लिए बड़ा अभियान शुरू किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में सरकार ने जमीन के रिकॉर्ड्स की स्कैनिंग और डिजिटलीकरण का काम शुरू कर दिया है। इस कदम से बिहार और उत्तर प्रदेश में स्थित बेतिया राज की हजारों एकड़ जमीन को सरकारी नियंत्रण में लाया जाएगा और अतिक्रमणकारियों के खिलाफ सख्त एक्शन होगा।
बेतिया राज की जमीन पर क्या नियम लागू होंगे
सरकार ने ‘राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग नियमावली 2026’ को मंजूरी दी है। इसके तहत बिहार में करीब 24,477.14 एकड़ और उत्तर प्रदेश के आठ जिलों में 175.53 एकड़ जमीन को दायरे में रखा गया है। सरकार ने 1 जनवरी 1986 की कट-ऑफ तारीख तय की है। जो लोग इस तारीख से पहले के वैध कागजात दिखाएंगे और 40 साल से कब्जा साबित करेंगे, वे शुल्क भरकर मालिकाना हक पा सकते हैं। इसके बाद कब्जा करने वालों को अतिक्रमणकारी मानकर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
रिकॉर्ड्स की स्कैनिंग और आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया
बेतिया राज कचहरी कार्यालय में दस्तावेजों की स्कैनिंग का काम शुरू हो चुका है, जिसका निरीक्षण राजस्व पार्षद की अपर सदस्य आशिमा जैन ने किया है। जिलाधिकारी तरनजोत सिंह ने इस काम में गोपनीयता और गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। संपत्तियों का विवरण सार्वजनिक होने के बाद लोग 60 दिनों के भीतर अपनी आपत्ति दर्ज करा सकेंगे। इन आपत्तियों का निपटारा सिविल कोर्ट की शक्ति रखने वाले विशेष अधिकारी 90 दिनों के भीतर करेंगे।
इन जमीनों का आगे क्या होगा उपयोग
सरकार का मकसद इन जमीनों को कब्जा मुक्त कराकर जनहित के कामों में लगाना है। इस जमीन पर भविष्य में अस्पताल, विश्वविद्यालय और अन्य सार्वजनिक सुविधाएं बनाई जाएंगी। उदाहरण के तौर पर, वाराणसी में बेतिया राज की 3.159 हेक्टेयर जमीन पर उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा हेलीपोर्ट बनाने की मंजूरी दी गई है। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट किया है कि सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
बेतिया राज की जमीन पर मालिकाना हक पाने के लिए क्या शर्त है
1 जनवरी 1986 से पहले से कब्जे में रहने वाले लोग, जो वैध दस्तावेजों के साथ 40 वर्षों का निरंतर कब्जा साबित कर सकते हैं, वे निर्धारित शुल्क देकर मालिकाना हक प्राप्त कर सकते हैं।
अवैध कब्जे के खिलाफ आपत्ति दर्ज कराने का समय क्या है
संपत्तियों का विवरण सार्वजनिक होने के बाद इच्छुक व्यक्ति 60 दिनों के भीतर अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं, जिसका निपटारा विशेष अधिकारी 90 दिनों में करेंगे।