Bihar में बख्तियारपुर-ताजपुर गंगा महासेतु निर्माण के दौरान हादसा, मशीन में खराबी से 4 श्रमिक घायल

Bihar/Samastipur: बिहार सरकार के एक बड़े प्रोजेक्ट बख्तियारपुर-ताजपुर गंगा महासेतु के निर्माण स्थल पर शनिवार सुबह एक हादसा हो गया। पिलर नंबर P-38 पर काम के दौरान मशीन में तकनीकी खराबी आने से एक ट्रे झुक गई, जिससे निर्माण

Bihar/Samastipur: बिहार सरकार के एक बड़े प्रोजेक्ट बख्तियारपुर-ताजपुर गंगा महासेतु के निर्माण स्थल पर शनिवार सुबह एक हादसा हो गया। पिलर नंबर P-38 पर काम के दौरान मशीन में तकनीकी खराबी आने से एक ट्रे झुक गई, जिससे निर्माण कार्य के दौरान स्लैब गंगा नदी में गिर गया। इस घटना में मौके पर काम कर रहे कई श्रमिक घायल हो गए हैं।

यह हादसा शनिवार सुबह करीब 9 बजे हुआ जब निर्माण कार्य के लिए Cantilever Form Traveller (CFT) मशीन का इस्तेमाल किया जा रहा था। रोड कंस्ट्रक्शन डिपार्टमेंट के मुताबिक मशीन में तकनीकी खराबी आई थी, जिसकी वजह से लोहे का एंगल गिर गया और नीचे लगी ट्रे झुक गई। हादसे के तुरंत बाद स्थानीय पुलिस और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। पतोरी DSP बीरेंद्र कुमार मेहतावी ने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

घायलों की बात करें तो मोहम्मद नवाब शेख नाम के एक श्रमिक, जो पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद के रहने वाले हैं, उनका इलाज पतोरी उप-विभागीय अस्पताल में चल रहा है। अन्य पांच घायल श्रमिकों को बेहतर इलाज के लिए पटना मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (PMCH) रेफर किया गया है, जिनमें से दो की हालत गंभीर बताई जा रही है।

सड़क निर्माण विभाग ने कहा है कि श्रमिकों की सुरक्षा उनकी प्राथमिकता है और हादसे के बाद तुरंत तकनीकी जांच कर मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है। फिलहाल सुरक्षा कारणों से निर्माण स्थल पर काम अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। विभाग अब यह जांच कर रहा है कि क्या निर्माण के दौरान सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था।

बता दें कि बख्तियारपुर-ताजपुर फोरलेन ब्रिज, जिसे मगध-मिथिला सेतु भी कहा जाता है, उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने के लिए बनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य महात्मा गांधी सेतु और राजेंद्र सेतु पर ट्रैफिक के दबाव को कम करना है। 2011 में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट की कुल लंबाई करीब 51.26 किलोमीटर है, जिसमें मुख्य पुल की लंबाई 5.51 किलोमीटर है। इससे पहले सितंबर 2024 में भी यहाँ एक स्पैन गिरने की घटना हुई थी, जिससे प्रोजेक्ट की क्वालिटी पर सवाल उठे थे।