Bihar: औरंगाबाद जिले की महादलित बस्तियों में अप्रैल के महीने में ही भीषण जल संकट गहरा गया है। मदनपुर प्रखंड की महुआवा पंचायत के सांवा बिगहा गांव में हालात इतने खराब हैं कि करीब 400 की आबादी वाले इस इलाके में लोग बूंद-बूं
Bihar: औरंगाबाद जिले की महादलित बस्तियों में अप्रैल के महीने में ही भीषण जल संकट गहरा गया है। मदनपुर प्रखंड की महुआवा पंचायत के सांवा बिगहा गांव में हालात इतने खराब हैं कि करीब 400 की आबादी वाले इस इलाके में लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। चापाकल सूख चुके हैं और सरकारी नल-जल योजना के तहत बनी जल मीनार सिर्फ दिखावा बनकर रह गई है, जिससे लोगों को एक किलोमीटर दूर कुएं से गंदा पानी लाना पड़ रहा है।
औरंगाबाद में जल संकट की क्या है स्थिति?
गांव के लोगों को पीने के लिए साफ पानी नहीं मिल रहा है, जिसके कारण उन्हें मजबूरन गंदा पानी इस्तेमाल करना पड़ रहा है। इस समस्या पर संज्ञान लेते हुए मदनपुर BDO डॉ. अवतुल्य कुमार आर्य ने PHED विभाग के अधिकारियों को नल-जल योजना की खराबी ठीक करने और जल्द से जल्द पानी की सप्लाई शुरू करने का निर्देश दिया है। वहीं, जिला अधिकारी अभिलाषा शर्मा सोन नदी आधारित पेयजल परियोजना की समीक्षा कर रही हैं ताकि दिसंबर 2026 तक शहर के हर घर में पाइपलाइन से पानी पहुंचाया जा सके।
बिहार में भविष्य के जल संकट की चेतावनी
केंद्रीय भूजल बोर्ड की 20 अप्रैल 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार में भूजल का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है, जिससे अगले 20-25 साल में गंभीर संकट हो सकता है। साल 2004 से 2025 के बीच भूजल उपयोग में 34% की बढ़ोतरी हुई है। जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी ने भी चेतावनी दी है कि अगर नदी पुनर्जीवन और जल संरक्षण पर ध्यान नहीं दिया गया, तो 2050 तक बिहार जल संकट वाले राज्यों की सूची में आ सकता है।
सरकार की तैयारी और राहत की उम्मीद
PHED सचिव पंकज कुमार पाल ने 25 अप्रैल 2026 को सभी क्षेत्रीय अधिकारियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं ताकि पेयजल आपूर्ति बनी रहे। सकारात्मक पक्ष यह है कि बांका जिले में जल-जीवन-हरियाली अभियान से भू-जल स्तर में सुधार हुआ है। साथ ही, IMD ने अनुमान लगाया है कि मानसून सामान्य से 8% कम रहेगा, लेकिन 26 और 27 अप्रैल को पटना समेत पूरे बिहार में बारिश के आसार हैं, जिससे गर्मी और उमस से कुछ राहत मिल सकती है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
औरंगाबाद में पानी की समस्या का मुख्य कारण क्या है?
गांव के चापाकल सूख गए हैं और नल-जल योजना के तहत बनी जल मीनार खराब पड़ी है, जिससे लोगों को दूर के कुओं से गंदा पानी लाना पड़ रहा है।
सोन जल योजना का लक्ष्य क्या है?
इस परियोजना का लक्ष्य दिसंबर 2026 तक औरंगाबाद शहर के 33 वार्डों के हर घर में पाइपलाइन के जरिए शुद्ध पेयजल पहुंचाना है।