Bihar : औरंगाबाद जिले में टीबी (Tuberculosis) को खत्म करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक बड़ा अभियान शुरू किया है। जिले के 463 गांवों को हाई रिस्क जोन यानी उच्च जोखिम वाले क्षेत्र माना गया है, जहां जांच और स्क्रीनिंग की र
Bihar : औरंगाबाद जिले में टीबी (Tuberculosis) को खत्म करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक बड़ा अभियान शुरू किया है। जिले के 463 गांवों को हाई रिस्क जोन यानी उच्च जोखिम वाले क्षेत्र माना गया है, जहां जांच और स्क्रीनिंग की रफ्तार बढ़ा दी गई है। इस मुहिम का मकसद ज्यादा से ज्यादा मरीजों की पहचान कर उन्हें सही इलाज देना है।
कैसे हो रही है मरीजों की पहचान और अब तक क्या नतीजा निकला
स्वास्थ्य विभाग की टीम घर-घर जाकर संभावित मरीजों की स्क्रीनिंग कर रही है। टीबी की पुष्टि के लिए मुख्य रूप से एक्स-रे और बलगम की जांच का सहारा लिया जा रहा है। इस अभियान के तहत अब तक औरंगाबाद जिले में 1300 से अधिक टीबी मरीज चिन्हित किए जा चुके हैं। जांच के लिए सदर अस्पताल में अल्ट्रा पोर्टेबल हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनें और ट्रू-नैट जैसी आधुनिक मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं।
टीबी मुक्त भारत अभियान और मरीजों को मिलने वाली मदद
यह स्थानीय अभियान केंद्र सरकार के ‘टीबी मुक्त भारत अभियान’ के दूसरे चरण का हिस्सा है। इस राष्ट्रीय कार्यक्रम का लक्ष्य 2025 तक टीबी को पूरी तरह खत्म करना है। बिहार में इस काम के लिए आशा कार्यकर्ता और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी जमीन पर काम कर रहे हैं।
- निक्षय योजना: टीबी मरीजों को पोषण सहायता के लिए हर महीने 1000 रुपये दिए जाते हैं।
- जांच सुविधा: जिले में 7 ट्रू-नैट और 1 सीबीएनएएटी मशीन से जांच की जा रही है।
- लक्ष्य: शीघ्र पता लगाना और इलाज तक आसान पहुंच बनाना।