Bihar: बिहार में अब सड़क पर जाम की वजह से मरीजों की जान जोखिम में नहीं पड़ेगी। राज्य प्रशासन ने सख्त फैसला लेते हुए निर्देश दिया है कि अगर कोई एंबुलेंस ट्रैफिक जाम में फंसती है, तो उसकी सीधी जिम्मेदारी ड्यूटी पर तैनात ट्
Bihar: बिहार में अब सड़क पर जाम की वजह से मरीजों की जान जोखिम में नहीं पड़ेगी। राज्य प्रशासन ने सख्त फैसला लेते हुए निर्देश दिया है कि अगर कोई एंबुलेंस ट्रैफिक जाम में फंसती है, तो उसकी सीधी जिम्मेदारी ड्यूटी पर तैनात ट्रैफिक पुलिस की होगी। 16 मई 2026 से लागू हुए इन नियमों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि गंभीर मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सके।
ट्रैफिक पुलिस की जवाबदेही और नए नियम क्या हैं
प्रशासन ने साफ किया है कि किसी भी चौराहे या रूट पर एंबुलेंस के फंसने पर संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। भागलपुर SSP प्रमोद कुमार यादव ने बताया कि मरीजों की जान बचाना पहली प्राथमिकता है और लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। इसके अलावा, अस्पतालों के मुख्य गेट के आसपास 100 मीटर के दायरे को ‘जीरो टॉलरेंस जोन’ बनाया गया है, जहां ई-रिक्शा और ऑटो की अवैध पार्किंग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी।
निगरानी के लिए तकनीक और अन्य इंतजाम
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत लगे हाई-टेक कैमरों से कंट्रोल रूम के जरिए 24 घंटे एंबुलेंस की मूवमेंट पर नजर रखी जाएगी। यह व्यवस्था खासकर भागलपुर जैसे शहरों में लागू की गई है। दरअसल, रोगी कल्याण समिति की बैठकों में सामने आया था कि जाम के कारण एंबुलेंस को अस्पताल पहुंचने में औसतन 20-25 मिनट की देरी होती थी। भागलपुर के JLNMCH अस्पताल की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले छह महीनों में 15-20 मरीजों की मौत अस्पताल पहुंचने से ठीक पहले जाम में फंसने के कारण हुई थी।
इमरजेंसी सेवाओं को मजबूत करने के अन्य कदम
पटना में भी राहत के लिए कदम उठाए गए हैं। 5 मई 2026 को चोला मंडलम जनरल इंश्योरेंस कंपनी ने CSR के तहत दो नई एंबुलेंस पटना ट्रैफिक पुलिस को दी हैं। ये एंबुलेंस अटल पथ, पटली पथ और JP गंगा पथ पर 24 घंटे तैनात रहेंगी और जल्द ही इन्हें डायल 112 हेल्पलाइन से जोड़ा जाएगा। साथ ही, सरकार ने निजी एंबुलेंस को भी डायल 112 से जोड़ना शुरू किया है ताकि सड़क हादसों में घायलों को तुरंत मदद मिल सके।
Frequently Asked Questions (FAQs)
एंबुलेंस जाम में फंसने पर पुलिस पर क्या कार्रवाई होगी?
16 मई 2026 से लागू नियमों के अनुसार, यदि कोई एंबुलेंस जाम में फंसती है, तो ड्यूटी पर तैनात ट्रैफिक पुलिसकर्मी को सीधे तौर पर जिम्मेदार माना जाएगा और उनके खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
अस्पतालों के पास ‘जीरो टॉलरेंस जोन’ क्या है?
अस्पताल के मुख्य गेट से 100 मीटर के दायरे को जीरो टॉलरेंस जोन घोषित किया गया है। यहां ऑटो, ई-रिक्शा की अवैध पार्किंग और अनावश्यक भीड़ पर पूरी तरह रोक रहेगी ताकि एंबुलेंस का रास्ता साफ रहे।