Bihar : बिहार सरकार के महिला एवं बाल विकास निगम और दिल्ली के छांव फाउंडेशन ने हाथ मिलाया है। इस साझेदारी का मकसद एसिड अटैक झेल चुके लोगों को फिर से समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। इस पहल से राज्य के लगभग 160 सर्वाइवर्स क
Bihar : बिहार सरकार के महिला एवं बाल विकास निगम और दिल्ली के छांव फाउंडेशन ने हाथ मिलाया है। इस साझेदारी का मकसद एसिड अटैक झेल चुके लोगों को फिर से समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। इस पहल से राज्य के लगभग 160 सर्वाइवर्स को सीधा फायदा मिलेगा, ताकि वे अपनी जिंदगी को नए सिरे से शुरू कर सकें।
पुनर्वास कार्यक्रम में क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी?
इस प्रोग्राम का पूरा जोर सर्वाइवर्स के समग्र विकास पर है। इसमें केवल आर्थिक मदद ही नहीं, बल्कि उनके जीवन के हर पहलू को सुधारने की कोशिश की जाएगी। मुख्य रूप से इन चार क्षेत्रों पर काम होगा:
- जरूरी चिकित्सा सहायता और इलाज
- शिक्षा के अवसर
- कौशल विकास (Skill Development)
- स्थायी आजीविका और रोजगार के साधन
मुआवजा और कानूनी मदद के क्या नियम हैं?
बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार ने एसिड अटैक पीड़ितों के लिए विशेष कानूनी सहायता और मुआवजे की व्यवस्था की है। नियमों के मुताबिक वित्तीय सहायता इस तरह दी जाएगी:
| समय सीमा |
मुआवजे की राशि |
| आवेदन के तुरंत बाद |
5,000 से 10,000 रुपये |
| 15 दिनों के भीतर |
1 लाख रुपये |
| दो महीने के भीतर |
शेष 2 लाख रुपये |
| प्रधानमंत्री राहत कोष |
1 लाख रुपये अतिरिक्त |
इसके अलावा आयुष्मान कार्ड के जरिए इलाज और प्लास्टिक सर्जरी के लिए 50,000 रुपये अलग से देने का प्रावधान है।
अस्पतालों और प्रशासन के लिए क्या निर्देश दिए गए हैं?
पटना उच्च न्यायालय ने इस मामले में कड़े निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को बाहर बोर्ड लगाना होगा कि एसिड अटैक पीड़ितों का मुफ्त इलाज किया जाता है। स्वास्थ्य विभाग ने इस आदेश को लागू करने के लिए औपचारिक निर्देश जारी करने की बात कही है। साथ ही, दोषियों को कम से कम 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। राज्य में मामलों की तेजी से जांच के लिए Forensic Science Lab (FSL) की संख्या भी बढ़ाई गई है।