Bihar के भरत तिवारी के लिए Delhi के जंतर-मंतर पर होगा बड़ा प्रदर्शन, 17 जुलाई को जुटेगा देशभर से लोग

Bihar/Delhi: भोजपुर जिले के शाहपुर में पुलिस मुठभेड़ में जान गंवाने वाले भरत भूषण तिवारी को न्याय दिलाने के लिए अब दिल्ली की सड़कों पर आंदोलन होगा। ‘वीर शहीद भरत तिवारी न्याय संघर्ष मोर्चा’ ने 17 जुलाई को दिल

Bihar/Delhi: भोजपुर जिले के शाहपुर में पुलिस मुठभेड़ में जान गंवाने वाले भरत भूषण तिवारी को न्याय दिलाने के लिए अब दिल्ली की सड़कों पर आंदोलन होगा। ‘वीर शहीद भरत तिवारी न्याय संघर्ष मोर्चा’ ने 17 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक राष्ट्रव्यापी धरना-प्रदर्शन और श्रद्धांजलि सभा आयोजित करने का फैसला किया है। इस आंदोलन के जरिए दोषी पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट के वकील और मोर्चा के अध्यक्ष अनिल मिश्रा ने इस पूरी घटना को मुठभेड़ नहीं बल्कि बर्बर हत्या बताया है। उनका आरोप है कि भरत तिवारी ने आत्मसमर्पण कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद उन्हें पहले तीन गोलियां मारी गईं और फिर पुलिस गाड़ी में वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश पर दो और गोलियां चलाई गईं। इस मामले में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपने के लिए आज से देशभर में एक हस्ताक्षर अभियान भी शुरू किया जा रहा है।

वहीं, इस मामले में कानूनी मोड़ तब आया जब सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया और याचिकाकर्ता को संबंधित हाई कोर्ट जाने की सलाह दी। इससे पहले बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस मामले में एक रिटायर्ड हाई कोर्ट जज की अध्यक्षता में स्वतंत्र न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। जांच पूरी होने तक स्थानीय थाना प्रभारी समेत चार पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है।

भोजपुर पुलिस ने इन आरोपों को गलत बताया है। पुलिस का कहना है कि तिवारी ने पहले पुलिस पर 8-10 राउंड फायरिंग की थी, जिसके जवाब में एसटीएफ को आत्मरक्षा में गोली चलानी पड़ी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि भरत तिवारी के शरीर में कुल पांच गोलियां लगी थीं। परिवार का आरोप है कि एसपी ने उन्हें धमकाया था, हालांकि पुलिस ने इस बात से साफ इनकार किया है।

मोर्चा के संयोजक पंकज त्रिपाठी ने बताया कि पहले बिहार विधानसभा के घेराव की योजना थी, लेकिन अब इसे बदलकर सीधे दिल्ली में प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के सामने मुद्दा उठाने का निर्णय लिया गया है। 21 वकीलों की एक न्याय समिति भी इस लड़ाई में शामिल है। भरत तिवारी के परिवार ने पुलिस और सरकार पर भरोसा खो दिया है और अब वे समाज के सहारे न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं।