Bihar के भरत भूषण तिवारी हत्याकांड के विरोध में Lucknow में प्रदर्शन, राष्ट्रपति को सौंपा ज्ञापन
Lucknow/Bihar: बिहार के भोजपुर जिले में एक सामाजिक कार्यकर्ता भरत भूषण तिवारी की मौत के बाद अब मामला गरमा गया है। इस घटना के विरोध में लखनऊ और शाहजहांपुर में प्रदर्शन हुए, जहां राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा (RAM) ने राष्ट्रपति
Lucknow/Bihar: बिहार के भोजपुर जिले में एक सामाजिक कार्यकर्ता भरत भूषण तिवारी की मौत के बाद अब मामला गरमा गया है। इस घटना के विरोध में लखनऊ और शाहजहांपुर में प्रदर्शन हुए, जहां राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा (RAM) ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष उच्च-स्तरीय जांच की मांग की है।
भरत भूषण तिवारी की मौत 17 जून 2026 को भोजपुर के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में एक कथित पुलिस मुठभेड़ के दौरान हुई थी। पुलिस ने पहले कहा कि तिवारी मानसिक रूप से बीमार थे, लेकिन बाद में दावा किया कि उन्होंने पुलिस पर गोली चलाई, जिसके जवाब में पुलिस ने आत्मरक्षा में गोली चलाई। पुलिस के इन अलग-अलग बयानों की वजह से अब इस मामले पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
इस घटना के बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। भोजपुर के ग्रामीणों ने NH-922 जाम कर न्याय की मांग की, जबकि जन सुराज पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उनका समर्थन किया। वहीं, प्रदर्शन के दौरान सड़क जाम करने के आरोप में तिवारी के पिता काशी नाथ तिवारी, भाई चंदन तिवारी और 12 अन्य लोगों के खिलाफ पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 20 जून 2026 को पटना उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। इसके अलावा, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) और राज्य मानवाधिकार आयोग में भी स्वतंत्र जांच के लिए याचिकाएं दायर की गई हैं।
मानवाधिकार अधिवक्ता एस.के. झा और वरिष्ठ अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने मांग की है कि इस मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। जन सुराज पार्टी ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक करने, एसआईटी गठन और पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपये मुआवजे के साथ सरकारी नौकरी देने की मांग रखी है।