भगवंत मान फेक वीडियो केस: दिल्ली और जींद की फॉरेंसिक लैब निकलीं अवैध, दो लोग गिरफ्तार

Punjab/Haryana: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के कथित फेक वीडियो मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में पता चला है कि दिल्ली और जींद में स्थित वे फॉरेंसिक लैब अवैध थीं, जिन्होंने भगवंत मान के पक्ष में रिपोर्ट जारी की

Punjab/Haryana: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के कथित फेक वीडियो मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में पता चला है कि दिल्ली और जींद में स्थित वे फॉरेंसिक लैब अवैध थीं, जिन्होंने भगवंत मान के पक्ष में रिपोर्ट जारी की थी। ये लैब बिना किसी लाइसेंस के चल रही थीं और नियमों की धज्जियां उड़ा रही थीं।

गुरुग्राम पुलिस के एसीपी क्राइम नवीन शर्मा ने 25 जून 2026 को इस मामले की जानकारी दी। पुलिस ने 23-24 जून 2026 को अंकित और अरुण नाम के दो लोगों को गिरफ्तार किया है। इन दोनों पर फर्जी फॉरेंसिक रिपोर्ट तैयार करने का आरोप है। पुलिस जांच में यह बात सामने आई कि इन लोगों के पास डिजिटल विश्लेषण के लिए कोई सरकारी मान्यता प्राप्त या अधिकृत लैब नहीं थी।

पकड़े गए आरोपियों में अंकित जींद का रहने वाला है और पिछले 4-5 साल से परिवार पहचान पत्र विभाग में कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहा था। वहीं, अरुण सिरसा का रहने वाला है और NIA में कॉन्ट्रैक्ट पर फॉरेंसिक विशेषज्ञ के तौर पर काम कर रहा था। इन दोनों को अब 8 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। मामले में ‘सिफर सेंटिनल लैब’ और ‘साइबेरियन लैब्स’ के नाम सामने आए हैं, जो बिना लाइसेंस के काम कर रही थीं।

इस विवाद में जसप्रीत सिंह नाम के एक फॉरेंसिक विशेषज्ञ ने शिकायत दर्ज कराई है। उसका आरोप है कि पंजाब सरकार के कुछ अधिकारियों ने उस पर फर्जी रिपोर्ट बनाने के लिए दबाव डाला और 10 लाख रुपये की रिश्वत देने की कोशिश की। व्हाट्सएप चैट में एसपी जशन गिल का नाम भी सामने आया है।

दूसरी तरफ, मुख्यमंत्री भगवंत मान का कहना है कि वायरल वीडियो फर्जी है और विपक्ष उन्हें बदनाम करने के लिए साजिश रच रहा है। पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने पंजाब के बाहर की दो सरकारी मान्यता प्राप्त लैब्स की रिपोर्ट पेश की है, जिसमें दावा किया गया कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति भगवंत मान नहीं है। इस पूरे मामले के बाद विपक्षी दल अब मुख्यमंत्री के इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं।