Bihar: भागलपुर अब देश के पर्यटन मानचित्र पर अपनी अलग पहचान बनाएगा। जलशक्ति मंत्रालय की ‘अर्थ गंगा ट्रेल’ परियोजना के तहत शहर को एक प्रमुख टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस योजना का मुख्य
Bihar: भागलपुर अब देश के पर्यटन मानचित्र पर अपनी अलग पहचान बनाएगा। जलशक्ति मंत्रालय की ‘अर्थ गंगा ट्रेल’ परियोजना के तहत शहर को एक प्रमुख टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस योजना का मुख्य मकसद गंगा किनारे मौजूद ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों को संवारना है ताकि ज्यादा से ज्यादा पर्यटक यहां आएं और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हों।
अर्थ गंगा ट्रेल प्रोजेक्ट में क्या खास होगा
इस प्रोजेक्ट के लिए पूरे देश से केवल दो शहरों, भागलपुर और कन्नौज को चुना गया है। इसका सबसे बड़ा कारण यहां की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और दुर्लभ गांगेय डॉल्फिन की मौजूदगी है। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) और IITTM की टीम 28 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक क्षेत्र का दौरा कर रही है। टीम कहलगांव से चंपानगर तक के इलाकों का निरीक्षण कर रही है ताकि डॉल्फिन-केंद्रित टूरिज्म और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की योजना बनाई जा सके।
किन स्थलों का होगा कायाकल्प और क्या मिलेगा लाभ
सरकार भागलपुर के कई पुराने और प्रसिद्ध स्थलों को रिवरफ्रंट के रूप में विकसित करेगी। इसमें विक्रमशिला विश्वविद्यालय, बटेश्वर स्थान, कहलगांव के गंगा घाट और पहाड़ियां, बूढ़ानाथ मंदिर, अजगैबीनाथ मंदिर और बरारी सीढ़ी घाट शामिल हैं। इसके अलावा, सुल्तानगंज से कहलगांव तक फैले विक्रमशिला गंगा डॉल्फिन अभयारण्य के लिए 802.66 लाख रुपये की लागत से इको-टूरिज्म और पार्क का काम शुरू हो चुका है।
स्थानीय कला और सिल्क उद्योग को मिलेगा बढ़ावा
पर्यटन के साथ-साथ भागलपुर की मशहूर सिल्क इंडस्ट्री और मंजूषा कला को भी इस योजना में खास जगह दी गई है। सरकार चाहती है कि जब पर्यटक यहां आएं, तो उन्हें स्थानीय कला का अनुभव मिले, जिससे बुनकरों और कारीगरों की कमाई बढ़े और उनकी कला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिले। यह पूरा मॉडल प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिए गए ‘अर्थ गंगा’ विजन पर आधारित है, जो नदी के संरक्षण के साथ-साथ लोगों की आर्थिक उन्नति पर केंद्रित है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
अर्थ गंगा ट्रेल परियोजना के तहत भागलपुर में किन मुख्य स्थलों को विकसित किया जाएगा
इस योजना के तहत विक्रमशिला विश्वविद्यालय, बटेश्वर स्थान, बूढ़ानाथ मंदिर, अजगैबीनाथ मंदिर, बरारी सीढ़ी घाट और कहलगांव के गंगा घाटों को रिवरफ्रंट के रूप में विकसित किया जाएगा।
इस प्रोजेक्ट से स्थानीय लोगों को क्या फायदा होगा
पर्यटन बढ़ने से रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और भागलपुर के सिल्क उद्योग व मंजूषा कला को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय कारीगरों और बुनकरों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।