Bihar: भागलपुर के रमासी गांव की सूरत अब बदलने वाली है। बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU), सबौर ने इस गांव को गोद लिया है ताकि इसे ‘सिंदूर ग्राम’ के रूप में विकसित किया जा सके। इस पहल का मुख्य मकसद पर्यावरण को बच
Bihar: भागलपुर के रमासी गांव की सूरत अब बदलने वाली है। बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU), सबौर ने इस गांव को गोद लिया है ताकि इसे ‘सिंदूर ग्राम’ के रूप में विकसित किया जा सके। इस पहल का मुख्य मकसद पर्यावरण को बचाना और गांव की महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है।
सिंदूर ग्राम योजना क्या है और इसका क्या फायदा होगा?
इस प्रोजेक्ट के तहत रमासी गांव में लगभग एक हजार सिंदूर (Bixa orellana) के पौधे लगाए जाएंगे। BAU सबौर के वैज्ञानिकों की टीम जमीन की उपजाऊ शक्ति और जलवायु की जांच कर रही है। गांव की महिलाओं को इन पौधों की देखभाल और खेती की ट्रेनिंग दी जाएगी। सिंदूर के पौधों से मिलने वाले बीज बाजार में काफी महंगे बिकते हैं, जिससे महिलाओं की कमाई बढ़ेगी और वे आत्मनिर्भर बनेंगी।
प्राकृतिक सिंदूर का उत्पादन और सरकारी मदद
विश्वविद्यालय ने प्राकृतिक सिंदूर बनाने की तकनीक विकसित की है जो पूरी तरह सुरक्षित है। इसमें लेड और मरकरी जैसी जहरीली धातुएं नहीं होतीं, जो आमतौर पर बाजार में मिलने वाले सिंथेटिक सिंदूर में होती हैं। इस नवाचार को बढ़ावा देने के लिए ‘Bihar Startup’ ने कटिहार की रीना सिंह को 10 लाख रुपये का अनुदान भी दिया है ताकि इसे बड़े स्तर पर बाजार में उतारा जा सके।
खेती में नए बदलाव और भविष्य की योजनाएं
- BAU सबौर ने ऐसे बीज तैयार किए हैं जिनसे पौधे जल्दी और ज्यादा उगते हैं।
- इन बीजों को कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) के जरिए किसानों तक पहुंचाया जाएगा।
- रमासी गांव में भविष्य में सिंदूर आधारित कुटीर उद्योग लगाने की योजना है।
- यह प्रोजेक्ट ‘उन्नत भारत अभियान’ का हिस्सा है, जिसमें यूनिवर्सिटीज को मॉडल गांव विकसित करने का निर्देश मिला है।