Bihar: भागलपुर रेलवे स्टेशन के पास बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए काम तेज हो गया है। रेलवे गुमटी नंबर 1 से 3 के बीच नई पटरियां बिछाने और अंडरपास के लिए बॉक्स निर्माण का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। इस काम का मुख्य
Bihar: भागलपुर रेलवे स्टेशन के पास बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए काम तेज हो गया है। रेलवे गुमटी नंबर 1 से 3 के बीच नई पटरियां बिछाने और अंडरपास के लिए बॉक्स निर्माण का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। इस काम का मुख्य मकसद रेल लाइनों का विस्तार करना और स्टेशन के पास यातायात को बेहतर बनाना है।
रेलवे यार्ड और अंडरपास में क्या बदलाव हो रहे हैं?
मालदा डिवीजन के अधिकारियों के अनुसार, गुमटी नंबर 1 से 3 के बीच कुल 8 शंटिंग लाइनों का निर्माण किया जाएगा। इसके साथ ही यहाँ अंडरपास के लिए बॉक्स बनाने का काम शुरू हो चुका है। भीखनपुर गुमटी नंबर 1 के पास बनने वाले अंडरपास की डिजाइन बदली गई है, जिससे अब इसकी ऊंचाई 4.2 मीटर और चौड़ाई 6 मीटर होगी। इस बदलाव के बाद परियोजना की लागत 10 करोड़ से बढ़ाकर 13.34 करोड़ रुपये कर दी गई है।
स्टेशन के विस्तार और अन्य प्रोजेक्ट्स की जानकारी
मालदा के ADRM अमरेंद्र कुमार मौर्य ने निर्माण स्थल का निरीक्षण किया है। प्लेटफॉर्म नंबर 2 और 3 के विस्तार के साथ-साथ फुटओवर ब्रिज की सीढ़ियों को चौड़ा करने का लक्ष्य दिसंबर तक रखा गया है। इसके अलावा, अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत भागलपुर जंक्शन का पुनर्विकास होगा, जिसमें रूफटॉप प्लाजा और वंदे भारत स्लीपर ट्रेन जैसी सुविधाएं मिलेंगी।
प्रमुख रेल परियोजनाओं का विवरण
| परियोजना |
विवरण/लागत |
उद्देश्य |
| सबौर-गोनूधाम बाईपास |
13.38 किमी, 303.20 करोड़ रुपये |
जंक्शन पर भीड़ कम करना |
| जगदीशपुर स्टेशन |
250 करोड़ रुपये |
नया रेलवे स्टेशन निर्माण |
| भीखनपुर अंडरपास |
13.34 करोड़ रुपये |
आपातकालीन वाहनों की सुगम आवाजाही |
| प्लेटफॉर्म विस्तार |
दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य |
यात्री सुविधा में सुधार |
Frequently Asked Questions (FAQs)
भागलपुर रेलवे स्टेशन के पास अंडरपास का काम कब तक पूरा होगा?
रेलवे अधिकारियों ने प्लेटफॉर्म विस्तार और यार्ड आधुनिकीकरण के काम को दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
सबौर-गोनूधाम रेल बाईपास प्रोजेक्ट की क्या खासियत है?
यह लगभग 13.38 किलोमीटर लंबा बाईपास होगा जिस पर 303.20 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इससे भागलपुर जंक्शन पर ट्रेनों की भीड़ कम होगी और परिचालन क्षमता बढ़ेगी।