Bhagalpur में खुले में फेंका जा रहा मेडिकल कचरा, 488 निजी अस्पताल और लैब पकड़े गए

Bhagalpur: जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं की बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहाँ के करीब 488 निजी अस्पताल और पैथोलॉजी लैब मेडिकल कचरे का निपटारा सही तरीके से नहीं कर रहे हैं और इसे खुले में फेंक रहे हैं। यह कचरा सड़कों के किनार

Bhagalpur: जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं की बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहाँ के करीब 488 निजी अस्पताल और पैथोलॉजी लैब मेडिकल कचरे का निपटारा सही तरीके से नहीं कर रहे हैं और इसे खुले में फेंक रहे हैं। यह कचरा सड़कों के किनारे और खाली मैदानों में बिखरा मिला है, जिससे आम लोगों में संक्रमण फैलने और पर्यावरण प्रदूषित होने का बड़ा खतरा पैदा हो गया है।

सिनर्जी वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी ने एक सर्वे किया था, जिसमें पता चला कि जिले में 1,100 से ज्यादा निजी अस्पताल, नर्सिंग होम और क्लीनिक हैं। इनमें से केवल 612 संस्थान ही कचरा कलेक्शन के लिए रजिस्टर्ड हैं, जबकि बाकी 488 संस्थान नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। सिनर्जी वेस्ट मैनेजमेंट की भगलपुर यूनिट 17 जिलों के कचरे को संभालने का काम करती है, जिस वजह से यहाँ बुनियादी ढांचे पर काफी दबाव है।

इस मामले में सिविल सर्जन डॉ. अशोक प्रसाद ने कहा है कि सिनर्जी वेस्ट मैनेजमेंट की रिपोर्ट मिलने के बाद दोषी संस्थानों पर कार्रवाई शुरू की जाएगी। वहीं, 24 जून 2026 तक कंपनी ने बकाया भुगतान न होने के कारण 27 लैब और अस्पतालों से कचरा उठाना बंद कर दिया है। इन डिफॉल्टर संस्थानों को नोटिस जारी कर बकाया राशि चुकाने और कचरे के सही निपटारे का निर्देश दिया गया है।

बिहार में बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट की स्थिति काफी खराब है। पूरे राज्य के 38 जिलों के लिए केवल चार प्लांट (भगलपुर, पटना, गया और मुजफ्फरपुर) ही उपलब्ध हैं। नियमों के मुताबिक, बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2016 के तहत कचरे को अलग करना और उसका सही ट्रीटमेंट करना अनिवार्य है। बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (BSPCB) ने पहले भी राज्य भर के हजारों स्वास्थ्य केंद्रों को नोटिस जारी किए थे और कई को बंद करने की चेतावनी दी थी।

वहीं, मयागंज स्थित सिनर्जी वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट पर भी गंभीर आरोप लगे हैं। 5 अगस्त 2024 को यहाँ प्लास्टिक कचरे की छंटाई और उसे बेचने की कोशिश की बात सामने आई थी। प्लांट अधिकारियों ने इसे मशीन खराब होने की वजह बताया। स्थानीय लोग प्लांट से निकलने वाले धुएं, बदबू और गंगा नदी में बिना ट्रीटमेंट के तरल कचरा बहाए जाने की शिकायत भी कर रहे हैं।