Bihar: भागलपुर, नवगछिया और कहलगांव के व्यवहार न्यायालय परिसरों में शनिवार, 9 मई 2026 को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। इस मौके पर कुल 10,486 वादों का निष्पादन हुआ और 68,198,238 रुपये की बड़ी राशि पर समझौता किया ग
Bihar: भागलपुर, नवगछिया और कहलगांव के व्यवहार न्यायालय परिसरों में शनिवार, 9 मई 2026 को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। इस मौके पर कुल 10,486 वादों का निष्पादन हुआ और 68,198,238 रुपये की बड़ी राशि पर समझौता किया गया। यह इस साल की दूसरी राष्ट्रीय लोक अदालत थी, जिसका मकसद लोगों के कानूनी विवादों को आपसी सहमति से जल्दी सुलझाना था।
किन-किन क्षेत्रों में हुई सुनवाई और कौन हुए शामिल
वादों के निपटारे के लिए कुल 31 बेंच बनाई गई थीं। इनमें से 22 बेंच भागलपुर, सात नवगछिया और दो कहलगांव में थीं। ट्रैफिक चालान के मामलों के लिए जिला स्कूल, भागलपुर में विशेष रूप से पांच बेंच लगाई गई थीं। इस कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश दीपांकर पाण्डेय, जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी, वरीय पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार यादव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने संयुक्त रूप से किया।
किस तरह के मामलों में हुआ समझौता
लोक अदालत में बैंक लोन, बिजली बिल, वैवाहिक विवाद और मोटर वाहन दुर्घटना जैसे कई तरह के केस सुलझाए गए। विशेष रूप से ट्रैफिक चालान के मामलों में लोगों को बड़ी राहत मिली, जहाँ 31 दिसंबर 2025 तक के लंबित चालानों पर 50% तक पेनल्टी में छूट दी गई।
| मामले का प्रकार |
सुलह राशि (रुपये) |
मामलों की संख्या |
| बैंक से जुड़े मामले |
43,433,196 |
978 |
| मोटर वाहन दुर्घटना बीमा |
11,610,000 |
14 |
| बिजली से जुड़े मामले |
7,474,065 |
227 |
| ट्रैफिक चालान |
4,760,319 |
7,062 |
लोक अदालत का फैसला कितना प्रभावी होता है
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश दीपांकर पाण्डेय ने बताया कि लोक अदालत से लोगों के समय और पैसे की बचत होती है। यहाँ लिया गया फैसला सिविल न्यायालय की डिक्री के समान होता है, जो अंतिम और बाध्यकारी है। इस फैसले के खिलाफ किसी भी अन्य अदालत में अपील नहीं की जा सकती। यह प्रक्रिया पूरी तरह सरल है और इसमें कोई अदालती शुल्क नहीं लगता है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ट्रैफिक चालान पर कितनी छूट मिली?
31 दिसंबर 2025 तक के लंबित ट्रैफिक चालानों पर 50% तक पेनल्टी में छूट दी गई, साथ ही लेट फीस और अतिरिक्त आर्थिक दंड से भी राहत मिली।
लोक अदालत के फैसले के खिलाफ अपील क्यों नहीं की जा सकती?
लोक अदालत का निर्णय एक सिविल न्यायालय की डिक्री के समान, अंतिम और सभी पक्षों के लिए बाध्यकारी होता है, इसलिए इसके खिलाफ अपील का प्रावधान नहीं है।