Bhagalpur संग्रहालय में मिलेंगे हजारों साल पुराने पेड़ के जीवाश्म, करोड़ों की लागत से होगा कायाकल्प
Bhagalpur: बिहार के ऐतिहासिक अंग प्रदेश का भागलपुर संग्रहालय अब और भी खास होने जा रहा है। यहाँ जल्द ही हजारों साल पुराने पेड़ के जीवाश्म (Tree Fossil) रखे जाएंगे, जिनकी खोज हाल ही में सैंडिस कंपाउंड में हुई है। जिला प्रश
Bhagalpur: बिहार के ऐतिहासिक अंग प्रदेश का भागलपुर संग्रहालय अब और भी खास होने जा रहा है। यहाँ जल्द ही हजारों साल पुराने पेड़ के जीवाश्म (Tree Fossil) रखे जाएंगे, जिनकी खोज हाल ही में सैंडिस कंपाउंड में हुई है। जिला प्रशासन और पुरातत्व विभाग इन दुर्लभ अवशेषों को संरक्षित कर संग्रहालय में लाने की तैयारी कर रहा है ताकि आम लोग और इतिहास प्रेमी इन्हें देख सकें।
हालिया जानकारी के मुताबिक, 7 जुलाई 2026 को जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन ने मॉर्निंग वॉक के दौरान पत्थर जैसी एक आकृति देखी, जिसे विशेषज्ञ ने प्राचीन वृक्ष जीवाश्म बताया है। पटना विश्वविद्यालय के डॉ. अतुल आदित्य पांडेय ने इसकी पुष्टि की है। जिलाधिकारी अलंकृता पांडेय और संग्रहालय एवं पुरातत्व निदेशालय के निदेशक कृष्ण कुमार ने इनके संरक्षण और संग्रहालय में शिफ्ट करने की अनुमति दे दी है।
भागलपुर संग्रहालय की स्थापना 11 नवंबर 1976 को हुई थी और इसका वर्तमान भवन 2006 में बना था। यहाँ मौर्य, कुषाण और गुप्त काल के दुर्लभ अवशेष मौजूद हैं। बिहपुर के गुवारडीह गांव से मिले 2,500 साल पुराने टेराकोटा बर्तन, आभूषण और तांबे के सिक्के यहाँ मुख्य आकर्षण हैं। इसके अलावा, पहली सदी की कुषाणकालीन यक्षिणी और छठी सदी के भगवान विष्णु की लाल बलुआ पत्थर की प्रतिमाएं भी यहाँ सुरक्षित रखी गई हैं।
संग्रहालय को अब एक नया और आधुनिक रूप दिया जाएगा। सरकार इसके सौंदर्यीकरण के लिए दो करोड़ रुपये खर्च करेगी, जिससे इसे लखीसराय संग्रहालय जैसा अत्याधुनिक बनाया जा सके। यहाँ अंग क्षेत्र की मशहूर लोक कला ‘मंजूषा’ के लिए एक अलग गैलरी बनेगी। साथ ही, खुले आंगन को ढका जाएगा ताकि मूर्तियां धूल और बारिश से बची रहें। अब संग्रहालय में प्रवेश के लिए टिकट लगेगा और इसके लिए जल्द ही काउंटर बनाया जाएगा।
वर्तमान में यह संग्रहालय सोमवार और सरकारी छुट्टियों को छोड़कर सुबह 10 बजे से शाम 5:30 बजे (गर्मियों में) और शाम 5 बजे (सर्दियों में) तक खुला रहता है। क्यूरेटर डॉ. सुधीर कुमार यादव के नेतृत्व में यहाँ मुगलकालीन सिक्कों, पांडुलिपियों और विभिन्न पेंटिंग्स का भी संग्रह है। प्रशासन का लक्ष्य है कि ज्यादा से ज्यादा स्थानीय लोग इस अनमोल धरोहर के बारे में जानें और यहाँ visit करें।