Bihar: भागलपुर के नगर निगम में मोटर पंप की खरीद में बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। नगर आयुक्त किसलय कुशवाहा ने खुद ग्राहक बनकर बाजार में पंप की कीमत पता की, जिससे अधिकारियों की मिलीभगत सामने आई। इस मामले में गंभीर लापरवाह
Bihar: भागलपुर के नगर निगम में मोटर पंप की खरीद में बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। नगर आयुक्त किसलय कुशवाहा ने खुद ग्राहक बनकर बाजार में पंप की कीमत पता की, जिससे अधिकारियों की मिलीभगत सामने आई। इस मामले में गंभीर लापरवाही पाए जाने पर दो इंजीनियरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है।
कैसे पकड़ा गया मोटर पंप खरीद का घोटाला
नगर आयुक्त किसलय कुशवाहा ने एक स्टिंग ऑपरेशन किया और शाह मार्केट स्थित उसी एजेंसी की दुकान पर गए, जिसने निगम को पंप सप्लाई करने थे। दुकानदार ने पंप की कीमत 18,500 रुपये बताई, जबकि निगम को दिए गए कोटेशन में इसी पंप की कीमत 28,000 रुपये दिखाई गई थी। इस तरह एक पंप पर करीब 10,000 रुपये की धोखाधड़ी सामने आई।
किन अधिकारियों पर हुई कार्रवाई
इस वित्तीय अनियमितता के बाद नगर आयुक्त ने तुरंत एक्शन लिया। सहायक अभियंता Sanjay Kumar और कनीय अभियंता Balram Jakhar का तीन महीने का वेतन रोक दिया गया है। दोनों अधिकारियों से 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर विभागीय कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
खरीद प्रक्रिया में कहां हुई चूक
नगर निगम ने भीषण गर्मी में जलापूर्ति बनाए रखने के लिए आउटसोर्सिंग के जरिए पंप खरीदने की व्यवस्था की थी। जलकल शाखा ने तीन बार ई-निविदा जारी की थी, जिसमें तीसरी बार एक स्थानीय एजेंसी को काम मिला। संबंधित इंजीनियरों की जिम्मेदारी थी कि वे बाजार और ऑनलाइन दरों का मिलान कर न्यूनतम दर तय करें, लेकिन उन्होंने इसमें भारी लापरवाही बरती।
Frequently Asked Questions (FAQs)
मोटर पंप की कीमत में कितना अंतर पाया गया?
बाजार में पंप की कीमत 18,500 रुपये थी, जबकि नगर निगम को 28,000 रुपये का कोटेशन दिया गया था, यानी प्रति पंप करीब 10,000 रुपये की अधिक वसूली की कोशिश की गई।
किन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है?
सहायक अभियंता संजय कुमार और कनीय अभियंता बलराम जाखड़ का तीन महीने का वेतन रोक दिया गया है और उनसे शो-कॉज नोटिस मांगा गया है।