Bihar: भागलपुर का जर्दालु आम तो पहले से ही मशहूर था, लेकिन अब यहां की मनराजी लीची भी दुनिया भर में अपनी पहचान बना रही है। पिछले दो सालों से इस लीची को दुबई, अमेरिका और मॉरीशस जैसे देशों में भेजा जा रहा है। खास बात यह है
Bihar: भागलपुर का जर्दालु आम तो पहले से ही मशहूर था, लेकिन अब यहां की मनराजी लीची भी दुनिया भर में अपनी पहचान बना रही है। पिछले दो सालों से इस लीची को दुबई, अमेरिका और मॉरीशस जैसे देशों में भेजा जा रहा है। खास बात यह है कि नवगछिया का इलाका, जो कभी अपराध और केले की खेती के लिए जाना जाता था, अब अपनी लीची की मिठास के लिए पहचाना जा रहा है।
मनराजी लीची की विदेशों में मांग और निर्यात की स्थिति
मनराजी लीची अपनी जबरदस्त मिठास, गहरे लाल रंग और मोटे छिलके की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में पसंद की जा रही है। मोटे छिलके के कारण इसे दूर के देशों तक भेजना आसान होता है। वर्तमान में इसे संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, घाना, कतर और ओमान जैसे देशों में भेजा जा रहा है। जून 2025 में किसान चंदन सिंह को APEDA के जरिए 50 टन लीची का निर्यात ऑर्डर मिला था। चंदन कुमार सिंह और मुकेश कुमार सिंह जैसे निर्यातक इस मुहिम को आगे बढ़ा रहे हैं।
GI टैग के प्रयास और सरकारी सहयोग
मनराजी लीची को भौगोलिक संकेत यानी GI टैग दिलाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। इसमें बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर और आत्मा, भागलपुर जैसे संस्थान किसानों की मदद कर रहे हैं। जिला कृषि पदाधिकारी अनिल यादव और उप परियोजना निदेशक प्रभात कुमार सिंह जैसे अधिकारी भी किसानों की सुविधाओं को सुधारने और उनकी मांगों को पूरा करने में जुटे हैं।
निर्यात में आने वाली चुनौतियां और समाधान
लीची के साथ सबसे बड़ी समस्या इसकी कम शेल्फ लाइफ है, क्योंकि यह साधारण तौर पर सिर्फ 2 दिन तक ही ठीक रहती है। कोल्ड चेन की कमी की वजह से अभी निर्यात ज्यादातर मध्य पूर्व के देशों तक सीमित है। हालांकि, अब लाइनर बैग जैसी नई पैकेजिंग तकनीक का इस्तेमाल करने की योजना है, जिससे लीची को 7 से 12 दिनों तक सुरक्षित रखा जा सके।
Frequently Asked Questions (FAQs)
मनराजी लीची किन देशों में निर्यात की जा रही है
मनराजी लीची का निर्यात दुबई, अमेरिका, मॉरीशस, सिंगापुर, घाना, कतर और ओमान जैसे देशों में किया जा रहा है।
मनराजी लीची की क्या खासियत है जो इसे निर्यात के लिए सही बनाती है
इस लीची की मिठास अधिक होती है और इसका छिलका मोटा होता है, जिससे यह लंबी दूरी के परिवहन के दौरान खराब नहीं होती।