Bihar: भागलपुर की मशहूर मंजूषा कला अब सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे दुनिया भर में पहचान दिलाने की तैयारी शुरू हो गई है। जिला प्रशासन और विभिन्न संस्थाएं मिलकर इस प्राचीन लोक कला को सहेजने और कलाकारों
Bihar: भागलपुर की मशहूर मंजूषा कला अब सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे दुनिया भर में पहचान दिलाने की तैयारी शुरू हो गई है। जिला प्रशासन और विभिन्न संस्थाएं मिलकर इस प्राचीन लोक कला को सहेजने और कलाकारों की कमाई बढ़ाने के लिए कई बड़े कदम उठा रही हैं। इसके तहत शहर में एक भव्य आर्ट गैलरी बनाई जाएगी जिससे स्थानीय कलाकारों को नया मंच मिलेगा।
मंजूषा कला के लिए क्या-क्या खास इंतजाम हो रहे हैं?
सितंबर 2025 तक भागलपुर संग्रहालय में मंजूषा कला के लिए एक भव्य गैलरी तैयार की जाएगी। इस गैलरी में मंजूषा से जुड़े चित्र, कैनवास, हस्तकला और सजावट के सामान रखे जाएंगे। साथ ही, संग्रहालय परिसर को दो करोड़ रुपये की लागत से सुंदर बनाया जाएगा। इसके अलावा, जून 2026 में ‘दिशा ग्रामीण विकास मंच’ और बिहार संग्रहालय मिलकर एक कार्यशाला करेंगे, जिससे कलाकारों के लिए रोजगार के नए मौके खुलेंगे।
सरकारी भवनों की दीवारों पर दिखेगी कला और मिलेगा रोजगार
जनवरी 2026 से जिला प्रशासन ने एक नई पहल शुरू की है, जिसमें महिला कलाकार सरकारी इमारतों की दीवारों पर मंजूषा पेंटिंग बना रही हैं। इसमें विक्रमशिला विश्वविद्यालय, अजगैबीनाथ धाम और तिलका मांझी जैसे स्थानीय विषयों को उकेरा जा रहा है। इससे न केवल शहर सुंदर होगा, बल्कि महिलाओं को घर के पास काम मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति भी सुधरेगी।
जीआई टैग और अंतरराष्ट्रीय पहचान का असर
मंजूषा कला को 14 सितंबर 2021 को आधिकारिक तौर पर GI टैग मिला था, जिससे इसकी वैल्यू बढ़ गई है। अब यह कला केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका इस्तेमाल कपड़ों, स्टेशनरी और गिफ्ट आइटम में भी हो रहा है। उद्योग मंत्री सैयद शाहनवाज हुसैन के अनुसार, यह कला अब मॉरीशस जैसे देशों तक पहुँच चुकी है। पटना में उपेंद्र महारथी अनुसंधान संस्थान के लिए 30 करोड़ रुपये की लागत से नई इमारत भी बन रही है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
मंजूषा कला क्या है और इसमें कौन से रंगों का इस्तेमाल होता है?
मंजूषा कला भागलपुर (अंग क्षेत्र) की एक प्राचीन लोक कला है जो बिहुला-विषहरी की गाथा पर आधारित है। इसमें मुख्य रूप से तीन रंगों का प्रयोग होता है: गुलाबी/लाल (प्रेम और त्याग), हरा (समृद्धि) और पीला (शांति और विकास)।
मंजूषा कलाकारों को लाभ पहुँचाने के लिए कौन सी संस्थाएं काम कर रही हैं?
दिशा ग्रामीण विकास मंच, बिहार संग्रहालय, भागलपुर जिला प्रशासन, उपेंद्र महारथी शिल्प अनुसंधान संस्थान और नाबार्ड जैसी संस्थाएं इस कला के पुनरुद्धार और कलाकारों के प्रशिक्षण के लिए काम कर रही हैं।