Bihar : भागलपुर की पारंपरिक मंजूषा कला अब सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं रही है। हाल ही में भोपाल में आयोजित एक राष्ट्रीय कार्यशाला में इस कला का शानदार प्रदर्शन किया गया, जहाँ इसे काफी पसंद किया गया। मंजूषा गुरु Manoj Pandit
Bihar : भागलपुर की पारंपरिक मंजूषा कला अब सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं रही है। हाल ही में भोपाल में आयोजित एक राष्ट्रीय कार्यशाला में इस कला का शानदार प्रदर्शन किया गया, जहाँ इसे काफी पसंद किया गया। मंजूषा गुरु Manoj Pandit ने बताया कि यह कला अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रही है और नई पीढ़ी के कलाकार भी इससे जुड़ रहे हैं।
मंजूषा कला को कैसे मिली नई पहचान
मंजूषा कला को 14 सितंबर 2021 को GI टैग मिला, जिससे इसकी असलियत और विरासत को कानूनी सुरक्षा मिली। बिहार सरकार ने 1984 में ‘जनसंपूर्ण विभाग’ कार्यक्रम शुरू किया था ताकि लोगों में इसकी जागरूकता बढ़े। साल 2014 से Upendra Maharathi Shilp Anusandhan Sansthan (UMSAS) के जरिए इसके लिए स्टेट अवार्ड प्रतियोगिता भी आयोजित की जा रही है।
कलाकारों के जीवन पर क्या पड़ा असर
भागलपुर के कला एवं संस्कृति अधिकारी Ankit Ranjan Pathak के मुताबिक, GI टैग मिलने के बाद यह कला महिलाओं के लिए कमाई का एक बड़ा जरिया बन गई है। NITI Aayog ने भी इस कला को बढ़ावा दिया है। कलाकार Anjana Kumari का कहना है कि अब उन्हें सरकारी कार्यक्रमों और देश भर की प्रदर्शनियों में अपनी कला दिखाने के ज्यादा मौके मिल रहे हैं।
मंजूषा कला को बढ़ावा देने वाले मुख्य प्रयास
- Manoj Pandit ने 1992 से सिल्क जैसे नए मटेरियल पर काम कर इसे आधुनिक बनाया।
- Dr. Ulupi Kumari ने मंजूषा आर्ट रिसर्च फाउंडेशन के जरिए 1,000 से ज्यादा ग्रामीण महिलाओं को ट्रेनिंग दी।
- जिला परिषद बैंकों में मंजूषा पेंटिंग्स लगाना अनिवार्य किया गया है ताकि कलाकारों को बाजार मिल सके।
- फरवरी 2025 में टसर सिल्क पर बनी मंजूषा कला की कृतियाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेंट के लिए तैयार की गईं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
मंजूषा कला को GI टैग कब मिला?
मंजूषा कला को 14 सितंबर 2021 को Geographical Indication (GI) टैग दिया गया, जिससे बिहार की इस विरासत को अंतरराष्ट्रीय पहचान और सुरक्षा मिली।
मंजूषा कला को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
बिहार सरकार ने 1984 से जागरूकता कार्यक्रम चलाए हैं, 2014 से स्टेट अवार्ड शुरू किए हैं और जिला परिषद बैंकों में इन पेंटिंग्स को प्रदर्शित करने का निर्देश दिया है।