Bhagalpur के लाल का कमाल, कोलगामा के कुंदन कुमार बने इंटरनेशनल कुश्ती के कोच

Bhagalpur: बिहार के भागलपुर जिले के सुल्तानगंज स्थित कोलगामा गांव के रहने वाले कुंदन कुमार ने अपनी मेहनत से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। कुंदन कुमार अब ‘कजाक कुराक कुश्ती’ (Qazaq Kuresi) के इंटरनेशनल

Bhagalpur: बिहार के भागलपुर जिले के सुल्तानगंज स्थित कोलगामा गांव के रहने वाले कुंदन कुमार ने अपनी मेहनत से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। कुंदन कुमार अब ‘कजाक कुराक कुश्ती’ (Qazaq Kuresi) के इंटरनेशनल कोच बन गए हैं। उनकी इस उपलब्धि के बाद पूरे इलाके में खुशी का माहौल है और लोग इसे गांव के युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा मान रहे हैं।

कुंदन कुमार ने दिन-रात कड़ी मेहनत और कुश्ती के प्रति अपने जुनून की वजह से इस मुकाम को हासिल किया। उन्होंने कजाक कुराक कुश्ती में नेशनल लेवल पर अपनी काबिलियत साबित की और अब वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोच की भूमिका निभाएंगे।

जानकारी के मुताबिक, कजाक कुराक कुश्ती कजाकिस्तान की एक पारंपरिक मार्शल आर्ट है। इस खेल में पहलवानों को ‘बाउलन्स’ कहा जाता है और वे नीली या लाल धारियों वाली खास वर्दी और बेल्ट पहनते हैं। इस खेल का मुख्य लक्ष्य प्रतिद्वंद्वी को जमीन पर गिराकर उसके कंधों को जमीन से छुआना होता है।

इस खेल के नियमों के अनुसार मुकाबला खड़े होकर किया जाता है और पैरों को हाथों से पकड़ने की अनुमति नहीं होती। साथ ही जमीन पर लड़ना या लेटना मना है। पहलवान कपड़े, बेल्ट, बाजुओं या धड़ को पकड़कर अपनी तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। पुरुषों के लिए मुकाबले की अवधि 5 मिनट और महिलाओं के लिए 4 मिनट तय की गई है।

इस खेल का संचालन Qazaq Kuresi एसोसिएशन और यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग (UWW) जैसी संस्थाएं करती हैं। यूनेस्को (UNESCO) ने साल 2016 में कजाक कुराक कुश्ती को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल किया था।