Bihar: भागलपुर के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (JLNMCH) के मरीजों के लिए अच्छी खबर है। अस्पताल में जल्द ही इमरजेंसी मेडिसिन विभाग की शुरुआत होने जा रही है। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने इसके लिए तैयारी पूरी कर र
Bihar: भागलपुर के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (JLNMCH) के मरीजों के लिए अच्छी खबर है। अस्पताल में जल्द ही इमरजेंसी मेडिसिन विभाग की शुरुआत होने जा रही है। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने इसके लिए तैयारी पूरी कर रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया है। इस नई सुविधा से सड़क दुर्घटना, हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसे गंभीर मामलों में मरीजों को तुरंत विशेषज्ञ इलाज मिल सकेगा।
इमरजेंसी मेडिसिन विभाग में क्या होगा खास
इस विभाग का मुख्य उद्देश्य गंभीर हालत में आने वाले मरीजों को बिना देरी के इलाज देना है। यहाँ ‘ट्राइएज सिस्टम’ लागू किया जाएगा, जिसमें मरीजों को उनकी हालत के हिसाब से रेड (अति गंभीर), येलो (तत्काल इलाज) और ग्रीन जोन (मामूली चोट) में बांटा जाएगा। इससे डॉक्टरों को यह तय करने में आसानी होगी कि किस मरीज का इलाज पहले करना है।
पीजी सीटों और वार्ड की क्या है तैयारी
NMC के नियमों के मुताबिक, पांच पीजी सीटों की मंजूरी के लिए कम से कम 20 बेड का समर्पित वार्ड होना जरूरी है। कॉलेज प्रशासन ने इसके लिए तैयारी शुरू कर दी है और सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में यह विभाग शुरू होगा। यदि सभी कागजी कार्रवाई समय पर पूरी होती है, तो इसी शैक्षणिक सत्र से पांच पीजी सीटों पर नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
कौन से डॉक्टर संभालेंगे जिम्मेदारी
इस विभाग को चलाने के लिए मेडिसिन, सर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स और एनेस्थीसिया विभाग के विशेषज्ञ मिलकर काम करेंगे। प्रशासन ने डॉ. सोमेन चटर्जी (हड्डी रोग), डॉ. रवि आनंद (मेडिसिन) और डॉ. हरिशंकर प्रसाद (सर्जरी) को यहाँ तैनात करने का फैसला किया है। जल्द ही एनेस्थीसिया विभाग से भी एक असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति की जाएगी जो पीजी छात्रों को ट्रेनिंग देंगे।
Frequently Asked Questions (FAQs)
JLNMCH के नए इमरजेंसी विभाग से मरीजों को क्या फायदा होगा?
गंभीर चोट, हार्ट अटैक या सांस की समस्या वाले मरीजों को त्वरित विशेषज्ञ चिकित्सा मिलेगी। ट्राइएज सिस्टम की मदद से गंभीर मरीजों को प्राथमिकता के आधार पर तुरंत इलाज दिया जाएगा।
पीजी सीटों के लिए क्या शर्तें रखी गई हैं?
NMC के नियमों के अनुसार, पांच पीजी सीटों की स्वीकृति के लिए अस्पताल में कम से कम 20 बेड का वार्ड और 6 बेड की गहन चिकित्सा इकाई (ICU) होना अनिवार्य है।